सरदार सरोवर बांध मामले में कांग्रेस व मेधा भ्रम फैला रहीं : मप्र सरकार

भोपाल, 1 अगस्त (आईएएनएस)। सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाए जाने से मध्यप्रदेश की नर्मदा घाटी में बसे परिवारों द्वारा किए जा रहे आंदोलन के पीछे सरकार ने कांग्रेस और नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर का हाथ होने का आरोप लगाया गया है। सरकार का कहना है कि सरदार सरोवर बांध मामले में कांग्रेस और मेधा भम्र फैला रही हैं।

राज्य सरकार के नर्मदा घाटी विकास मंत्री (राज्यमंत्री) लाल सिंह आर्य ने मंगलवार को संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा, “सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाने से 178 गांव डूब क्षेत्र में आने वाले हैं, उनमें से 107 गांव के लोग आपसी सहमति से बगैर किसी के दवाब के अपने घर और गांव को छोड़कर चले गए हैं। सरकार की ओर से उन्हें उचित मुआवजा दिया गया है।”

आर्य ने बताया, “खरगोन व अलीराजपुर के सभी गांव खाली हो चुके हैं, बड़वानी व धार के अभी पांच हजार परिवार अपने ही गांव में है। इनमें से 1,500 ऐसे परिवार हैं, जिन्हें डूब में नहीं आना है।”

आर्य ने दावा किया कि राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय राशि से ज्यादा का मुआवजा देने का निर्णय लिया है, कुल 900 करोड़ रुपये की राशि बांटी जानी है। पुनर्वास स्थलों पर 98 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं।

नर्मदा घाटी मंत्री आर्य से संवाददाताओं ने सवाल किया कि जब सरकार प्रभावितों को भरपूर मुआवजा और अच्छे पुनर्वास स्थल दे रही है तो आंदोलन क्यों हो रहा है। इस पर आर्य का जवाब था कि कांग्रेस और नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर भ्रम फैलाने में लगे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे प्रभावित इलाकों का दौरा करने गए हैं तो उनका जवाब था कि अधिकारी वहां कई बार जाकर सरकार को रिपोर्ट देते हैं।

ज्ञात हो कि नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 138 मीटर है। पुनर्वास की अंतिम तारीख 31 जुलाई थी, मगर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस मामले की सुनवाई की तारीख आठ अगस्त तय किए जाने से प्रभावित होने वाले परिवारों को कुछ राहत मिली है।

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