नई दिल्ली, 2 अगस्त (आईएएनएस)। रजा फाउंडेशन की ओर से शुरू की गई एक नई योजना के तहत कलापारखी दर्शकों के समक्ष शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य और थियेटर से जुड़े युवा कलाकारों को मंच पर लाइव परफॉर्मेंस देने का एक सुनहरा अवसर दिया जा रहा है।
‘आरम्भ’ नाम से यह योजना फाउंडेशन के संस्थापक स्वर्गीय एस. एच. रजा के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है ताकि पहचान पाने के लिए संघर्षरत होनहार भारतीय कलाकारों को सहयोग एवं संरक्षण मिल सके।
इसी महीने शुरू की गई ‘आरम्भ’ योजना के तहत फाउंडेशन दिल्ली में दो अलग-अलग स्थानों पर प्रस्तुति देने के लिए हर महीने दो अलग-अलग विधाओं के दो कलाकारों को आमंत्रित करेगी। कार्यक्रम प्रस्तुति पूरी तरह से फाउंडेशन द्वारा प्रायोजित होगी और फाउंडेशन ही कलाकारों को पारितोषिक देने का भी निर्णय ले सकती है।
इच्छुक कलाकार/परफॉर्मर्स इस श्रंखला में प्रविष्टि पाने की संभावना तलाशने के लिए अपने सीवी और फोटोग्राफ तथा परफॉर्मेंस के वीडियो के साथ रजा फाउंडेशन डॉट दिल्ली एट जीमेल डॉट कॉम पर संपर्क कर सकते हैं। फाउंडेशन सभी प्रविष्टियों के चयन से पहले उनका मूल्यांकन करेगी।
आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2017 है।
भारत के एक बेहतरीन आधुनिकतावादी के तौर पर दुनियाभर में प्रसिद्ध रजा साहब को भारतीय कला, संगीत, कविता और नृत्य से जुड़ी युवा पीढ़ियों की प्रतिभा और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए इस फाउंडेशन के संस्थापक और वित्तपोषक के तौर पर जाना जाता है।
रजा फाउंडेशन के मैनेजिंग ट्रस्टी अशोक वाजपेयी बताते हैं, “हालांकि रजा साहब ने अपने अंतिम वर्षों में भारत लौटने से पहले पेरिस में दशकों तक काम किया लेकिन अपनी मातृभूमि के युवा कलाकारों के संघर्ष और अपर्याप्त अवसरों के लिए हमेशा चिंतित रहे।”
वाजपेयी ने कहा, “भारत में लगभग हर साल दौरा करने के दौरान वह युवा कलाकारों से मिलकर उनके कार्यों पर चर्चा करते थे। पेरिस स्थित उनके घर में उनके बेहतरीन कार्यों की उपलब्धियों का एक विशाल कलेक्शन था। युवा कलाकारों के लिए रजा साहब का बेहिचक सहयोग उनके उन दिनों के संघर्ष की परिणति है जब वह और एम. एफ. हुसेन, एफ. एन. सूजा, एच. ए. गेडे, एस. के. बाकरे और कृष्णाजी आरा जैसे उनके अन्य सहयोगी अपने शुरूआती दिनों में ऐसा ही संघर्ष कर रहे थे और उन्होंने मिलकर बंबई में प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप का गठन किया था।”
रजा साहब ने कई वर्षों तक प्रस्तुतियों की श्रंखला भी चलाई थी, जिसमें वह युवा कलाकारों के साथ अपनी कला की साझा प्रस्तुति करते थे। उन्होंने 2001 में फाउंडेशन की स्थापना की और प्रतिभावान भारतीय कलाकारों को पुरस्कृत करना शुरू किया।
साल बीतने के साथ ही फाउंडेशन की गतिविधियों का दायरा बढ़ता गया जिसमें पत्रिकाओं, कैटेलॉग्स और पुस्तकों का प्रकाशन, कला संवाद, प्रदर्शनी, नृत्य एवं संगीत समारोहों का आयोजन, कविता पाठ और पोएट्री बिनाले जैसे कार्यक्रम भी होने लगे। फाउंडेशन युवा कलाकारों के लिए शिविरों तथा कार्यशालाओं का भी आयोजन करती है और उन्हें छात्रवृत्ति देकर मदद करती है।
पिछले साल जुलाई में 94 साल की उम्र में रजा साहब का इंतकाल हो गया लेकिन यह फाउंडेशन उनकी समृद्ध मानवतावादी विरासत को कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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