सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.एस. खेहर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय पीठ ने तीन तलाक की वैधानिकता पर अपना फैसला सुनाया।
फैसले में कहा गया, “एक साथ तीन तलाक असंवैधानिक है और इसे तुरंत खत्म किया जाए। इस्लामिक देशों में जब तीन तलाक खत्म हो चुका है तो आजाद भारत में इससे मुक्ति क्यों नहीं मिल पाई। सरकार इसके संदर्भ में छह महीने के अंदर कानून बनाए। यदि सरकार छह माह के अंदर तीन तलाक खत्म करने के लिए ड्राफ्ट नहीं ला पाती है तो कानून बनने तक रोक जारी रहेगी।”
इस फैसले के बाद प्रतिक्रियाओं का दौर चल पड़ा, इसी कड़ी में रामपुर के विधायक और सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां ने कहा कि न्यायालय के फैसले का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय के बाद भी जनता की अदालत है। भारत में लोकतंत्र है तो आस्था से खिलवाड़ नहीं होगा, वरना कब किसकी आस्था पर घात हो जाए, पता नहीं।”
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