नई दिल्ली, 8 सितंबर, (आईएएनएस)। बढ़ते क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि में सार्वभौमिक एकता की बढ़ती आवश्यकता और शरणार्थी संकट से मानवता के समक्ष उत्पन्न चुनौती पर शुक्रवार को सोका गाकाई अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष दाइसाकु इकेदा के 2017 के शांति प्रस्तावों पर आयोजित संगोष्ठी में गहन चर्चा की गई।
इस संगोष्ठी में भारत के योजना आयोग के पूर्व सदस्य और बोस्टन परामर्श समूह के अध्यक्ष अरुण मायरा, रक्षा और सामरिक मामलों के विशेषज्ञ सी. उदय भास्कर, अर्थशास्त्रीय संबंधों पर भारतीय अनुसंधान परिषद के प्रमुख रजत कथूरिया और सुप्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना एम. एस. प्रतिभा प्रमुख वक्ता रहे।
संस्था की ओर से जारी बयान के अनुसार, भारत में सोका गाकाई के अध्यक्ष विशेष गुप्ता ने कहा, “संघर्ष के इस दौर में मानवीय रूप से किसी दूसरे तक पहुंचना और उसे सुनना आज बहुत कम दिखाई देता है। अत: विश्वास व समग्रता की संस्कृति स्थापित करने की आवश्यकता है। भारत सोका गाकाई, अंतर्राष्ट्रीय सोका गाकाई से सम्बद्ध भारतीय संस्था है।”
डॉ. इकेदा के लेखों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि डॉ. इकेदा ने इन लेखों में विभिन्न संस्कृतियों और राष्ट्रों के बीच अंतर को पाटने के लिए संवाद के माध्यम से हल ढूंढ़ने पर बल दिया है, ताकि सारी मानवता एकजुट होकर समस्त समस्याओं का हल खोज सके।
अपने नवीनतम शांति प्रस्ताव ‘युवाओं की वैश्विक एकता : आशा के एक नए युग में प्रवेश में’ डॉ. इकेदा ने कहा कि हमें विस्थापितों की समस्या को संख्या की ²ष्टि से ही नहीं देखना चाहिए, अपितु सही मामले में न्याय संगत और समावेशी समाज के निर्माण के सन्दर्भ में इसे समझना चाहिए।
डॉ. इकेदा ने संयुक्त राष्ट्र और विश्व के विश्वविद्यालयों से शरणार्थी युवाओं के लिए शैक्षिक अवसर बनाने के लिए मिल कर काम करने का आग्रह किया।
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