नयी दिल्ली, 10 सितम्बर (आईएएनएस)। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी बाढ़ पूरी तरह से मानव निर्मित है। भारी बारिश के बाद सड़कों पर पानी के भरने की वजह जल निकासी व्यवस्था में कमी, प्लास्टिक की थैलियां, खुले जगह की कमी और जलवायु परिवर्तन है।
नयी दिल्ली, 10 सितम्बर (आईएएनएस)। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी बाढ़ पूरी तरह से मानव निर्मित है। भारी बारिश के बाद सड़कों पर पानी के भरने की वजह जल निकासी व्यवस्था में कमी, प्लास्टिक की थैलियां, खुले जगह की कमी और जलवायु परिवर्तन है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के पानी का संग्रहण, प्लास्टिक थैलों पर प्रतिबंध, बेहतर मौसम संबंधी भविष्यवाणी ऐसे उपाय हैं जिससे भारी बारिश के बाद शहरों में जलभराव की समस्या समाप्त हो सकती है।
भारत में अधिकतर मेट्रो शहरों में भारी बारिश के बाद सामान्य जनजीवन प्रभावित हो जाता है। पिछले महीने मुंबई में भारी बारिश के बाद छह लोगों की मौत हो गई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में लगातार पलायन, निगम अधिकारियों के निराशाजनक रवैये की वजह से भारी बारिश के बाद शहर ठहर जाते हैं।
भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) में आपदा प्रबंधन के वरिष्ठ प्रोफेसर वी. के. शर्मा ने कहा कि शहरों में कूड़े निस्तारण की समुचित प्रणाली, नालियों की नियमित सफाई और मैला निपटाने की समुचित व्यवस्था की जरूरत है।
शर्मा ने आईएएनएस से कहा, “यह सही है कि नालों और सीवेज की समुचित सफाई न होने से शहरी बाढ़ आती है। इसका एक वजह शहरों की ओर पलायन भी है जिससे जमीन अतिक्रमण की घटना के फलस्वरूप मौजूदा आधारभूत संरचना पर भारी दबाव बन जाता है। ”
शर्मा ने कहा कि शहरी नियोजन एक दीर्घकालिक दृष्टि से किया जाना चाहिए और जनसंख्या के बढ़ते दबाव के हिसाब से आधारभूत ढांचे का विकास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य बनाए जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि इसके साथ सरकारी अधिकारियों, म्युनिसिपट अधिकारियों को नालों-नालियों की सफाई नहीं होने पर जिम्मेदार ठहराए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जो लोग कूड़ा खुले में फेंकते हैं उन पर जुर्माना लगाया जाना चाहिए।
dharmpath.com dharmpath