मुंबई, 13 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी पत्रकारिता के पुरोधा बाबूराव विष्णु पराड़कर की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें याद करने के बजाय उनसे जुड़ी हुई जानकारियां और अन्य चीजों को संकलित कर पराड़कर के गांव को हिंदी पत्रकारिता का तीर्थ बनाने का संकल्प मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित संगोष्ठी में किया गया।
मुंबई प्रेस क्लब एवं काशी पत्रकार संघ द्वारा बुधवार को संयुक्त रूप से हिंदी पत्रकारिता के शिखर पुरुष बाबूराव विष्णुराव पराड़कर की स्मृति में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का आयोजन हिंदी पत्रकारिता के पुरोधा माने जानेवाले पराड़कर के सिंधुदुर्ग स्थित मूल ग्राम पराड में उनके प्रस्तावित स्मारक की रूपरेखा पर विचार करने के लिए किया गया था।
काशी विद्यापीठ में पत्रकारिता विभाग के निदेशक एवं काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष रह चुके प्रोफेसर राममोहन पाठक ने कहा, “मराठीभाषी होते हुए भी हिंदी के लिए किया गया पराड़कर का योगदान ऐतिहासिक है। उन्होंने राष्ट्र को हिंदी के कई शब्द देने का काम किया। यहां तक कि ‘राष्ट्रपति’ शब्द भी पराड़कर जी की देन है।”
मुंबई प्रेस क्लब के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर ने कहा कि ऐसी परिचर्चाओं की आज जरूरत है, जो मराठी और हिंदी भाषियों के टकराव को कम कर सके।
केतकर ने कहा कि कोंकण ने इस देश की आजादी की लड़ाई से लेकर हिंदी-मराठी पत्रकारिता को भी समृद्ध करने का काम किया है।
माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा ने कहा, “बाबूराव विष्णुराव पराड़कर जी की स्मृति को जीवित रखने के लिए उनके साहित्य और पत्रकारिता से जुड़े दस्तावेज संकलित करने की आवश्यकता है। ताकि आनेवाले दिनों में पत्रकारिता से जुड़े छात्रों को उसका लाभ मिल सके।”
महाराष्ट्र में सकाल के संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार एस.के.कुलकर्णी पराड़कर के जीवनवृत्त पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सिंधुदुर्ग स्थित पराड़कर के गांव पराड में पहले पराड़कर के नाम पर एक विद्यालय था। लेकिन अब इस पुरोधा की कोई स्मृति या स्मारक वहां नहीं है। यह स्मारक वहां बनाए जाने की जरूरत है।
इस अवसर पर बाबूराव विष्णुराव पराड़कर की परंपरा का निर्वाह कर रहे मुंबई के ऐसे वरिष्ठ पत्रकारों को काशी पत्रकार संघ द्वारा सम्मानित किया गया, जो मराठीभाषी होते हुए हिंदीभाषा में या हिंदीभाषी होकर भी मराठी भाषा में पत्रकारिता कर रहे हैं।
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