नई दिल्ली, 18 सितंबर (आईएएनएस)। कंे द्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को कहा कि यह जरूरी था कि सीमावर्ती इलाकों को देश के परिक्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए और इसे एक तर्कसंगत दृष्टिकोण की जरूरत है।
फिक्की-पीडब्ल्यूसी रिपोर्ट ‘स्मार्ट बॉर्डर प्रबंधन-भारतीय तटीय और समुद्री सुरक्षा’ को जारी करने के बाद रिजिजू ने कहा कि दूसरे देशों ने अपने सीमावर्ती क्षेत्रों को नागरिकों के स्थायीकरण, व्यापार और वाणिज्यिक गतिविधियों में संलग्न कर सक्रिय रूप से अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
फिक्की द्वारा जारी एक बयान का हवाला देते हुए रिजिजू ने कहा, “इन देशों के सीमावर्ती क्षेत्र अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं, जहां बुनियादी सुविधाएं और दूरसंचार सेवाएं मौजूद हैं, जबकि भारत ने अपने सीमा क्षेत्रों को अलग कर रखा है और नागरिक आंदोलन और वाणिज्य को प्रतिबंधित कर रखा है।”
उन्होंने कहा कि सीमा प्रबंधन में कई एजेंसियों की मिलीभगत के कारण नीतियों को लागू करने और प्रौद्योगिकी को अपनाने में देरी हुई थी।
एक उदाहरण का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि एक पूर्ण-शरीर स्कैनर को थकाऊ निविदा प्रक्रिया के जरिए स्थापित करना पड़ता है, जिसके कारण अन्य औपचारिकताओं में अनावश्यक विलंब होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों को तुरंत हल करने की जरूरत है।
फिक्की-पीडब्ल्यूसी रिपोर्ट, भारतीय तट के तटवर्ती सुरक्षा तंत्र पर केंद्रित है, और विभिन्न हितधारकों के समेकन की और समुद्री सुरक्षा में निजी एजेंसियों को शामिल करने की सिफारिश करती है।
रिपोर्ट में समुद्र तट के किनारे मछली पकड़ने वालों की गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियों के बीच अधिक सहयोग, तटीय सुरक्षा श्रृंखला में समुद्री पुलिस के एकीकरण की सिफारिश की गई है।
इसके साथ-साथ द्वारिका (गुजरात) में राष्ट्रीय समुद्री पुलिस प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना में तेजी लाने के साथ साथ, ट्रैकिंग करने के लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में संस्थान और समुद्री पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों के बीच बातचीत की भी सिफारिश की गई है।
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