भारत में अस्वच्छता की कीमत 50 अरब डॉलर से ज्यादा

नई दिल्ली, 18 सितंबर (आईएएनएस)। यूनिसेफ के प्रमुख ने सोमवार को कहा कि भारत को ‘अपर्याप्त स्वच्छता’ के परिणामस्वरूप हर साल 53.8 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा है, जिसमें जल-जनित बीमारियों के उपचार पर खर्च शामिल है।

यूनिसेफ के एक बयान में निकोलस ओसबर्ट ने कहा, “भारत जल से पैदा होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए भारी कीमत चुका रहा है। 2008 में प्रकाशित विश्व बैंक के एक अध्ययन से पता चला है कि भारत में अपर्याप्त स्वच्छता का कुल आर्थिक प्रभाव प्रति वर्ष 53.8 अरब डॉलर है, जो इसी अवधि में भारत के सकल विकास उत्पादन 6.4 प्रतिशत के बराबर है।”

ओसबर्ट उन वक्ताओं में से एक हैं जो देश में स्वच्छता की स्थिति के बारे में आयोजित एक गोल मेज पर डेटा पेश कर रहे थे, जहां केंद्र सरकार का ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान चलाया जा रहा था।

यह अभियान शुक्रवार को कानपुर के ईश्वरगंज गांव में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा शुरू किया गया है, जिसे हाल ही में खुले में शौच से मुक्त कर दिया गया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अध्ययन का हवाला देते हुए, ओसबर्ट ने कहा कि भारत में पांच बच्चों के बीच मौत दस्त के कारण होती है जो वैश्विक मौतों का 22 प्रतिशत हिस्सा है।

संयुक्त राष्ट्र के आधिकारी ने कहा कि भारत सरकार का स्वच्छ भारत मिशन खुले में शौच की ‘असभ्य समस्या’ के खिलाफ चलाया गया आंदोलन है।

स्वच्छ भारत मिशन के परिणामस्वरूप ‘व्यवहार परिवर्तन के हस्तक्षेप की वास्तविक प्राथमिकता’ के बारे में उन्होंने कहा कि व्यवहार परिवर्तन एक जटिल मुद्दा है, इसमें सरकार, समाज, निजी क्षेत्र, धार्मिक नेता और मीडिया का समर्थन भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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