मऊ जिले के थाना दोहरीघाट निवासी पीड़िता का आरोप है कि चार सितम्बर को कार सवार दबंगों ने उसे अगवा किया और दो दिन तक एक कमरे में बंद रख उससे सामूहिक दुष्कर्म किया। पीड़िता का कहना है कि इस अपराध के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने उसका परिवार जब मऊ पुलिस के पास गया तो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने करने के बजाए उसके ही परिवार को प्रताड़ित किया जाने लगा।
पीड़िता ने इंसाफ के लिए 16 सितम्बर को लखनऊ पहुंचकर विधानसभा के सामने आत्मदाह का प्रयास किया था। उस वक्त वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे बचा लिया और कार्रवाई का भरोसा दिलाया था।
अपने वृद्ध माता-पिता के साथ गुरुवार को फिर डीजीपी कार्यालय पहुंची पीड़िता का कहना है कि लखनऊ पुलिस के आश्वासन पर वह तो घर वापस चली गई, इसके बाद थानाध्यक्ष दोहरीघाट उसे प्रताड़ित करने लगे।
पीड़िता का आरोप है कि दोहरीघाट पुलिस ने उसे धमकाकर सादे पन्ने पर हस्ताक्षर करवा लिए और अपनी मर्जी से बयान दर्ज कर लिया। पीड़िता का आरोप है कि दोहरीघाट थाना अध्यक्ष आरोपियों के रिश्तेदार हैं। वह आरोपियों को बचा रहे हैं।
पीड़िता ने धमकी दी है कि यदि थानाध्यक्ष को हटाया नहीं गया और उसे न्याय नहीं मिला तो वह शुक्रवार को फिर आत्मदाह का प्रयास करेगी।
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