केरल : विजयदशमी पर बच्चे करते हैं अक्षरारंभ

तिरुवनंतपुरम, 30 सितम्बर (आईएएनएस)। समय बदल रहा है और इसके साथ ही वे दिन भी बीत चले हैं जब केरल में विजयदशमी केवल हिंदू मनाते थे। इन दिनों हजारों की संख्या में बच्चे यहां जाति, धर्म से उपर उठकर पहली बार अक्षर लिखते हैं।

मंदिरों, क्लबों, मीडिया संगठनों में शनिवार सुबह युवा अभिभावकों की भारी भीड़ देखी गई। इस दिन केरल में छोटे बच्चों द्वारा अक्षर लिखने की शुरुआत करना बहुत शुभ माना जाता है और परिवार के बड़े-बूढ़े, पुरुष और महिलाएं अपने छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर लिखाने में मदद करते हैं।

इस दौरान हिंदू बच्चे ‘हरि श्री गणपतये नम:’, और इसाई बच्चे ‘श्री येशु मिशहिहाये नम:’ लिखते हैं। कुछ जगहों पर सोने की अंगूठी से शिक्षक बच्चे के जिह्वा पर मलयालम शब्द लिखते हैं। उसके बाद अभिभावक शिक्षक को इसके लिए दक्षिणा देते हैं।

विययदशमी के दिन त्रिसूर के समीप थुनाछन परमाबू में इस रस्म को निभाने के लिए हमेशा की तरह बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं। यह स्थान मलयालम साहित्यकार थुंछाथु इझुथाछन का घर माना जाता है, जहां ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता वासुदेवन नैयर कई बच्चों को उसका पहला अक्षर सिखाने में मदद करते हैं।

कोट्टायम जिले के पानाचिक्कड में मां सरस्वती को समर्पित मंदिर पानाचिक्काडु में भी इस अवसर पर लोगों की भारी भीड़ देखी जाती है।

यह मंदिर दक्षिण मूकामबिका के नाम से मशहूर है और यहां 56 शिक्षक छोटे बच्चों को पहला अक्षर लिखना सिखाते हैं। इस बार मंदिर में रिकार्ड 20,000 पंजीकरण हुए हैं और मंदिर प्रबंधन ने बताया कि यह सत्र तड़के चार बजे से शुरू होकर सूर्यास्त तक चलेगा।

राज्य के अग्रणी मीडिया घरानों ने भी कई केंद्रों पर इस समारोह का अयोजन किया है। शिक्षक की भूमिका मुख्यमंत्री वी. एस. अच्युतानंदन समेत कई सेवानिवृत्त अधिकारी, प्रसिद्ध साहित्यकार इत्यादि निभा रहे हैं।

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