नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान पर सख्ती और तेजी से बढ़ते चीन पर नजर रखते हुए, भारत और अमेरिका ने बुधवार को कहा कि इस्लामाबाद को आतंकी संगठनों और अपने धरती पर आतंकवादियों के सुरक्षित पानाहगाहों को तत्काल समाप्त करने के लिए कदम उठाने चाहिए। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा के लिए साथ काम करने पर भी सहमत हुए।
विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने अमेरिकी विदेशमंत्री रेक्स टिलरसन के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, “भारत और अमेरिका दोनों इसपर सहमत हुए हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई अफगान नीति तभी प्रभावी होगी, जब पाकिस्तान अपनी धरती पर आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।”
सुषमा ने कहा, “हमने काफी देर तक आतंकवाद के मुद्दे पर चर्चा की। हमने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई अफगान व दक्षिण एशिया नीति पर भी चर्चा की, ताकि इसके वांछित नतीजे प्राप्त किए जा सकें।”
मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका यह सुनिश्चित करने पर सहमत हुए हैं कि कोई भी देश आंतकवादियों का सुरक्षित पनाहगाह न बने।
उन्होंने कहा, “हमने अफगानिस्तान में बढ़ रही आतंकवादी घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की। इनसे आज भी यह साबित हो रहा है कि कुछ तत्व हैं, जो आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराते हैं और आतंकवादियों का समर्थन करते हैं।”
उन्होंने कहा, “जो भी देश आतंकवादियों का समर्थन करते हैं, उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। हम इस बात पर भी सहमत हुए कि पाकिस्तान को अपनी जमीन से आतंकवादियों के सुरक्षित पनाहगाहों को समाप्त करना चाहिए। हम मानते हैं कि ट्रंप की नई नीति तभी सफल होगी, जब पाकिस्तान सभी आतंकी समूहों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई करेगा।”
टिलरसन ने मंगलवार को अपने इस्लामाबाद दौरे के दौरान पाकिस्तान से कहा था कि उसे अपने देश से आतंकवादियों के खात्मे के प्रयास को और बढ़ाना चाहिए।
अमेरिका ने बुधवार को कहा कि वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा और आतंकवाद के सुरक्षित पनाहगाहों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेशमंत्री टिलरसन ने कहा कि अमेरिका एक अग्रणी शक्ति के रूप में उभरते भारत का समर्थन करता है और भारत के सैन्य आधुनिकीकरण के लिए उसे उन्नत प्रौद्योगिकी देने को तैयार है।
सोमवार को अपने अघोषित अफगानिस्तान दौरे के दौरान टिलरसन ने कहा था कि अमेरिका अफगान संसद की इमारत समेत वहां अन्य आधारभूत कार्यो के लिए भारत के उदार योगदान को कृतज्ञता के साथ स्वीकार करता है।
सुषमा ने कहा कि उन्होंने और टिलरसन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियों और मुद्दों के बारे में भी चर्चा किया। वहीं टिलरसन ने कहा कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग जारी रखेंगे।
टिलरसन ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त में दक्षिण एशिया के लिए एक नई नीति की घोषणा की थी, जो अफगानिस्तान के प्रति और इसके साथ ही दक्षिण एशियाई क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता दोहराती है।
उन्होंने कहा, “इस प्रयास में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है। अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा। आतंकवाद के पनाहगाहों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
टिलरसन ने कहा कि वह पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के लिए भारतीय क्षमताओं में योगदान देते रहेंगे।
उन्होंने कहा, “इसके मद्देनजर हम भारत के सैन्य आधुनिकीकरण के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियां उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं। इसमें एफ-16 और एफ-18 लड़ाकू विमानों के लिए अमेरिकी उद्योग की ओर से महत्वाकांक्षी प्रस्ताव शामिल हैं।”
टिलरसन ने पिछले महीने अमेरिकी रक्षामंत्री जेम्स मैटिस की भारत यात्रा का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, “वह (मैटिस) और मैं अगले साल की शुरुआत में होने वाली टू-प्लस-टू वार्ता के लिए उत्सुक हैं।”
उन्होंने कहा, “हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं, क्योंकि हम दोनों ही वाणिज्य में नियम आधारित रुख और आर्थिक विकास के लिए पारदर्शी और सतत नजरिए को बढ़ावा देते हैं। हम इस प्रयास में अपने करीबी सहयोगी जापान का साथ पाकर खुश हैं। तीनों देशों की सेनाएं हिंद महासागर क्षेत्र में वार्षिक मालाबार अभ्यास में भाग लेती हैं, चीन जिसे संदेह भरी नजर से देखता है।”
टिलरसन ने साथ ही कहा कि उनका देश अफगास्तिान के विकास में भारत के योगदान को तह-ए-दिल से मानता है।
टिलरसन ने कहा कि दोनों देशों का 70 साल से भी ज्यादा समय से करीबी संबंध रहा है और दोनों देशों के बीच व्यापार 18वीं शताब्दी में शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को मजबूत आर्थिक संबंधों से लगातार लाभ हुए हैं।
टिलरसन ने कहा कि इस माह की शुरुआत में चार दशकों के बाद भारत को पहली बार अमेरिकी कच्चे तेल की आपूर्ति की गई।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों के अनुसार हम स्वाभाविक साझेदार हैं। हम उनकी दोस्ती और भारत-अमेरिका के करीबी रिश्ते के उनके दृष्टिकोण के आभारी हैं। निस्संदेह हमारा भी यही दृष्टिकोण है।”
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