शिमला, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को यह बताने का निर्देश दिया कि शिमला में सार्वजनिक संपत्ति पर पोस्टर लगाने वाले राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों पर क्या कार्रवाई की गई है।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की एक खंडपीठ ने देवेन खन्ना नामक व्यक्ति की याचिका पर यह फैसला सुनाया।
खन्ना ने मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दलों ने राज्य भर में विशेष दीवार लेखन अभियान शुरू किया है।
उनके मुताबिक राजनीतिक दलों ने हर संभव जगहों पर अपनी पार्टियों के नारे लिख कर पोस्टर चस्पा कर दिए हैं जिनमें वोट देने की अपील की गई है।
सरकारी संपत्तियों की दीवारों पर लेखन 1985 के हिमाचल प्रदेश सार्वजनिक स्थल ओपन प्लेसेज (प्रीवेंशन आफ डिस्फिगरमेंट एक्ट) के तहत निषिद्ध है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों ने इस अदालत द्वारा पारित आदेशों का उल्लंघन किया है।
इस मामले की अगली सुनवाई अदालत में 7 नवम्बर को होगी। उल्लेखनीय है कि राज्य में 68 विधानसभा सीटों के लिए मतदान इसके दो दिन बाद होना है।
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