कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल राम नाईक ने कहा, “जीवन में कभी शार्टकट नहीं लेना चाहिए। यदि असफलता मिलती है तो निराश नहीं होना चाहिए। यह देखना चाहिए कि क्या कमी रही, उस कमी को दूर कर आगे बढ़ना चाहिए। 17 में से 12 गोल्ड मेडल छात्राओं को मिलना महिला सशक्तिकरण का परिचायक है। मेडल पाने वाली छात्राओं की संख्या बता रही कि छात्राओं को मौका दिया जाए तो वह सभी को पीछे छोड़ सकती हैं।”
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी.बी. भोसले ने कहा, “जिंदगी में क्या करना है, यह तय होना चाहिए। आज तरक्की के रास्ते बहुत हैं। सिर्फ नौकरी ही तरक्की का पैमाना नहीं है। जिंदगी एक क्रिकेट गेम की तरह है। बॉल रूपी अवसर पर हिट करते जाओ। मत सोचो की शॉट मिस हुआ। कभी निराश न हों।”
dharmpath.com dharmpath