नई दिल्ली, 8 नवंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा पकड़े गए आतंकी वित्तपोषण मामले के नौ आरोपियों में से एक ने खुद को राजस्व खुफिया निदेशालय(डीआरआई) का पूर्व वरिष्ठ अधिकारी बताकर अमान्य घोषित किए गए 36.34 करोड़ रुपये के नोटों को बदलने की कोशिश की थी। इस मामले में कुछ बैंक अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। एनआईए ने बुधवार को यह जानकारी दी।
एनआईए के प्रवक्ता आलोक मित्तल ने आईएएनएस को बताया, “दीपक तोपरानी अपने आप को दूसरों के समक्ष डीआरआई के पूर्व महानिदेशक के रूप में पेश करता था।”
मित्तल ने कहा कि इस मामले में जांच के दौरान कई बैंक अधिकारियों के नाम सामने आए हैं।
उन्होंने बिना किसी का नाम लिए बिना बताया, “कुछ बैंक अधिकारियों की मिलीभगत का पता चला है, जिसकी बाद में जांच की जाएगी।”
प्रवक्ता ने बताया, “गिरफ्तार किए गए कुछ लोगों के अलगाववादियों के साथ ‘सामान्य संबंध’ हैं।”
उन्होंने कहा कि एजेंसी को जम्मू एवं कश्मीर के अलगाववादियों से पूछताछ के दौरान नोटबंदी के बाद अमान्य नोटों के बदले जाने की खुफिया जानकारी मिली थी।
अधिकारी ने बताया कि नौ आरोपियों के पास से 36.34 करोड़ रुपये मूल्य के पुराने नोट मिले हैं, जिन्हें मंगलवार को जम्मू एवं कश्मीर में व्यापारियों समेत कई लोगों से बरामद किया गया।
उन्होंने दावा किया कि तोपरानी ने उनलोगों से नोट बदलने का वादा कर उन्हें विश्वास में लिया।
एनआईए ने यहां जम्मू एवं कश्मीर आतंकवादी वित्तपोषण मामले में 36 करोड़ 34 लाख 78 हजार पांच सौ रुपये के पुराने नोट बरामद किए और दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया।
अधिकारी ने बताया कि एक गिरफ्तार व्यक्ति को रिहा कर दिया गया, क्योंकि इस मामले में उसकी कोई भूमिका नहीं थी।
इन आठ लोगों के पकड़ने के बाद इस मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या अब 18 हो गई है।
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