नई दिल्ली, 13 नवंबर (आईएएनएस)। भारतीय रेल ने अपने कर्मचारियों की उत्पादकता और दक्षता को बढ़ाने के लिए उन्हें कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम में भेजने का निर्णय लिया है।
नई दिल्ली, 13 नवंबर (आईएएनएस)। भारतीय रेल ने अपने कर्मचारियों की उत्पादकता और दक्षता को बढ़ाने के लिए उन्हें कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम में भेजने का निर्णय लिया है।
रेलवे ने अपने सभी कर्मियों के लिए यह विशाल अभियान चलाया है, जिसका नाम प्रोजेक्ट सक्षम रखा गया है। यह कार्यक्रम अगले एक साल तक जारी रहेगा। इसके अंर्तगत सभी जोन के कर्मियों को उनके कार्यक्षेत्र में एक सप्ताह के लिए कौशल और ज्ञान में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए भेजा जाएगा।
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्विनी लोहानी द्वारा 30 अक्टूबर को सभी जोनल महाप्रबंधकों को भेजे गए पत्र में जोर दिया गया है कि “सभी कर्मचारियों की दक्षता को बढ़ाने के लिए एक कम अवधि के प्रशिक्षण कार्यक्रम को शुरू करने की जरूरत है।”
देश में बढ़ते रेल नेटवर्क, नई ट्रेनें, विभिन्न उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं, बेहतर सुविधाओं और सेवाओं के लिए यात्रियों की बढ़ती अपेक्षाएं और रेल सफर को सुरक्षित और बेहतर बनाने का सरकार के वादे के मद्देनजर वादे को पूरा करने के लिए एक अवसर की शुरुआत करने की जरूरत है।
लोहानी ने कहा, “यह तय किया गया है कि अगले एक साल में सभी जोन के कर्मियों को उनके कार्यक्षेत्र में एक सप्ताह के लिए कौशल और ज्ञान में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए भेजा जाएगा।”
उन्होंने महाप्रबंधकों से यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि प्रत्येक श्रेणी के कर्मचारियों को उनके विशिष्ट क्षेत्र में ट्रेनिंग की आवश्यकता की तुरंत पहचान की जाए और 31 दिसंबर, 2017 तक एक कार्यक्रम तैयार किया जाए।
उन्होंने कहा, “यह ट्रेनिंग पांच दिनों के लिए होगी और रेलवे ट्रेनिंग केंद्रों में होने वाली क्लासरूम ट्रेनिंग, ट्रेनिंग की प्रकृति पर निर्भर होगी।”
उन्होंने महाप्रबंधकों को 9 महीने के भीतर प्रशिक्षण पूरा करने के निर्देश दिए और परियोजना सक्षम के प्रभाव का पता लगाने के लिए आंकड़ा तैयार कर प्रगति पर व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के लिए कहा।
मुंबई में 29 सितंबर को एल्फिन्स्टन स्टेशन पर मची भगदड़ में 23 लोगों की मौत और 150 से ज्यादा लोगों के घायल हो जाने के बाद रेलमंत्री ने श्रृंख्लाबद्ध कदम उठाने की घोषणा की थी, जिसमें सुरक्षा संबंधी कार्य करने के लिए शक्ति का विकेंद्रीकरण शामिल है।
रेलवे ने 25 अक्टूबर को कहा था कि महाप्रबंधकों को बिना किसी सीमा के सुरक्षा से संबंधित कार्यो को मंजूरी देने के लिए पूर्ण शक्ति दी गई है। लेकिन यह कार्य वित्त मंत्रालय द्वारा निर्धारित वित्तीय सीमा के अंदर होने चाहिए।
डिवीजनल रेलवे प्रबंधक (डीआरएम) और चीफ वर्कशॉप मैनेजर अब से जहां कहीं भी रिक्तियां हों, सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों को 62 साल की उम्र तक सुरक्षा और रखरखाव संबंधी कार्यो के लिए रख सकते हैं।
फास्ट ट्रैक पर सुरक्षा कार्य के साथ-साथ ट्रैक मशीनों की मरम्मत के लिए फील्ड अधिकारियों की शाक्तियां बढ़ाई गई हैं।
रेलवे ने लोकोमोटिव, डिब्बों और स्पेयर पार्ट्स जैसे सामग्री की खरीदारी की प्रक्रियाओं को काफी सरल कर दिया है।
जूनियर फील्ड ऑफिसर्स और सुपरवाइजर प्रभारी को बहुउद्देश्यीय वाहन उपलब्ध कराए गए हैं और अगर उनके पास वाहन नहीं है तो वह बिना वक्त गवाएं ब्रेक डाउन स्थलों पर जाने के लिए 5000 रुपये प्रति मामले तक वाहन किराए पर ले सकते हैं। इससे ट्रेन सेवाओं में तेजी से बहाली होगी और ट्रेनों की सुरक्षा/समयबद्धता में सुधार होगा।
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