गया, 15 नवंबर (आईएएनएस)। बौद्घ संप्रदाय के आस्था का केंद्र बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर स्थित पवित्र ‘महाबोधिवृक्ष’ पूरी तरह स्वस्थ है। पवित्र वृक्ष पर पोषक तत्वों का छिड़काव किया गया है।
देहरादून के राष्ट्रीय वन अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने सोमवार और मंगलवार को महाबोधि वृक्ष का निरीक्षण किया और उन्होंने आवश्यक उपचार किए।
महाबोधि मंदिर प्रबंधन समिति के सचिव एऩ दोरजी ने बुधवार को आईएएनएस को बताया, “लंबे समय से बोधिवृक्ष की सेहत की जांच में जुटे वैज्ञानिक डॉ. एऩ एस़ क़े हर्ष के निर्देशन में बोधिवृक्ष की पत्तियों व शाखाओं पर दवाओं का छिड़काव किया गया। वैज्ञानिकों ने कहा कि बोधिवृक्ष पूरी तरह स्वस्थ है।”
उन्होंने बताया, “वृक्ष की पत्तियों के सूखने की शिकायतें मिल रही थीं। वैज्ञानिकों ने बताया कि इसमें चिंता करने जैसी कोई बात नहीं है। पिछले दिनों भी बोधिवृक्ष पर कुछ पोषक दवाओं का छिड़काव किया गया था।”
उन्होंने बताया कि वृक्ष पर कई जगह दवाओं का लेप भी किया गया है। इस क्रम में बोधिवृक्ष की जड़ों तक पोषक तत्वों को पहुंचाने के लिए आसपास की मिट्टी की खुदाई कर मिट्टी में भी पोषक तत्व व कंपोस्ट डाला गया है।
उल्लेखनीय है कि 26 अगस्त को इस पवित्र वृक्ष की एक टहनी टूटकर गिर गई थी। देहरादून वन अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक बोधिवृक्ष की देखरेख करते हैं।
मान्यता है कि इसी महाबोधि वृक्ष के नीचे राजकुमार सिद्धार्थ ने कठिन तपस्या कर ज्ञान प्राप्त किया था, जिसके बाद वह महात्मा बुद्घ कहलाने लगे थे। इस पवित्र महाबोधि वृक्ष को देखने के लिए हर साल देश-विदेश से लाखों लोग बोधगया आते हैं। बताया जाता है कि यह वृक्ष करीब 2,650 साल पुराना है।
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