नई दिल्ली, 24 नवंबर (आईएएनएस)। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का बोझ हल्का करने के लिए इसकी परियोजनाओं में कमी करने की पहल जारी रखते हुए केंद्र सरकार 2,000 किलोमीटर की आगामी राजमार्ग परियोजनाओं को राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) को हस्तांतरित करने जा रही है।
नई दिल्ली, 24 नवंबर (आईएएनएस)। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का बोझ हल्का करने के लिए इसकी परियोजनाओं में कमी करने की पहल जारी रखते हुए केंद्र सरकार 2,000 किलोमीटर की आगामी राजमार्ग परियोजनाओं को राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) को हस्तांतरित करने जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार के इस फैसले के पीछे राजमार्ग परियोजनाओं को गति देना है, क्योंकि परियोजनाओं में विलंब होने से लागत बढ़ जाती है।
हालांकि 20 अहम रणनीतिक व अर्ध-रणनीतिक राजमार्गो के लिए लागत का निर्धारण नहीं किया गया है, लेकिन एक अनुमान के मुताबिक इन परियोजनाओं पर 25,000 करोड़ रुपये (चार अरब डॉलर) का खर्च आ सकता है, क्योंकि पर्वतीय प्रदेशों में सरकार 11-13 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर राजमार्ग निर्माण पर खर्च करती है।
सरकार की इस पहल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एनएचआईडीसीएल जल्द ही 1,053.05 किलोमीटर लंबाई की 10 परिजोजनाएं अपने हाथ में लेने जा रहा है। बाकी परियोजनाओं का अधिग्रहण जांच पड़ताल के बाद किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, एनएचआईडीसीएल अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मणिपुर और उत्तराखंड में राजमार्ग परियोजनाओं को बीआरओ से अपने हाथ में लेगा। इनमें चुराचांदपुर-तिपैमुख की 262 किलोमीटर की सबसे लंबी परियोजना शामिल है। इसके बाद 170.88 किलोमीटर की जेसामी-यांगनपोकपी राजमार्ग परियोजना दूसरी सबसे लंबी परियोजना है। जल्द ही औपचारिकताएं पूरी होने के बाद एनएचआईडीसीएल की ओर से इन परियोजनाओं पर काम शुरू हो जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय बीआरओ की कार्य-प्रगति से खुश नहीं है, क्योंकि इसकी चाल बहुत मंद है।
इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से कहा गया था कि बीआरओ पर इसकी क्षमता से ज्यादा बोझ है। कैबिनेट ने एक नोट में कहा था, “बीआरओ ने अपने आकार से ज्यादा काम लेना शुरू कर दिया है। आरंभ में इसके पास सिर्फ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण निर्माण कार्य ही थे, लेकिन बाद में इसने असैन्य कार्य भी अपने जिम्मे ले लिए।”
इस प्रकार परियोजनाओं को पूरा करने में विलंब होने लगा। मणिपुर में 220 किलोमीटर लंबे राजमार्ग-53 के निर्माण में विलंब होने से इसकी लागत 1,100 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,600 करोड़ रुपये हो गई।
कैबिनेट नोट में कहा गया है कि अत्यंत मंद प्रगति के कारण सड़क निर्माण कार्य बीआरओ से हस्तांतरित किया जाता है।
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