पटना, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। पटना के नवनिर्मित सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर के ज्ञान भवन में चल रहे 10 दिवसीय पुस्तक मेले के छठे दिन गुरुवार को जहां दिनभर परिचर्चाओं का दौर चला, वहीं शाम को नवोदित कवयित्रियों द्वारा कविता पाठ से माहौल खुशनुमा बन गया। इस बीच, पुस्तक प्रेमियों ने न केवल पुस्तकों की खरीदारी की, बल्कि काव्य पाठ का भी आनंद लिया।
सेंटर फॉर रीडरशिप डेवलपमेंट (सीआरडी) और कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा आयोजित पटना पुस्तक मेले के 24वें संस्करण में कस्तूरबा मंच पर ‘शायरी और समाज’ पर परिचर्चा का आयोजन किया गया।
इस परिचर्चा में भाग लेते हुए सबसे पहले शायर समीर परिमल ने कहा कि शायरी और समाज एक दूसरे के पूरक हैं। शायर अपने आसपास के परिवेश से ही घटनाओं और दृश्यों को उठाता है, उसी की काव्याभिव्यक्ति करता है। उन्होंने बताया कि ऐसे तों शायरी दरबारी संस्कृति की विधा रही है, लेकिन समय बदलने के बाद यह अब आम लोगों की जुबान बन गई।
कवि संजय कुंदन ने कहा कि शायरी और समाज दोनों को जाने के बिना इस पर व्याख्या करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि जब दूसरों की पीड़ा आपकी हो जाती है, तभी शायरी होती है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि यह अलग बात है कि आज भी समाज में शयरी को तवज्जो नहीं दी जाती है।
वरिष्ठ शायर कासिम खुर्शीद ने कहा कि शायरी और समाज हरेक दौर में साथ-साथ सफर करता रहा है। उन्होंने कहा कि मां खुश होती है तो शायरी होती है, बच्चा जब हंसता है या फूल खिलते हैं, तब शायरी होती है। उनका मानना है कि शायर इस समाज का जीवंत प्रतीक है।
इसके अलावा कस्तूरबा मंच पर ‘राह भटकती कविता’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में भाग लेते हुए लेखिका प्रोफेसर सुनीता गुप्ता ने कहा, “कविता पर आज बाजारवाद हावी हो गया है।”
विभिन्न विमर्शो से इतर स्त्री विमर्श पर उन्होंने कहा कि नब्बे के दशक के बाद इसमें ढेर बदलाव आए हैं। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक मनुष्य सपने देखेगा, तब तक कविता जीवित रहेगी।
परिचर्चा में कवि डॉ़ विनय कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “कविता में कभी भटकाव नहीं आया है। जब-जब नई पीढ़ियों ने नई लीक बनाई, उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा।”
उन्होंने कहा कि सरल वाक्य में बड़ी बात करने की क्षमता ही कविता है। उन्होंने मुहावरा ‘लीक छोड़ तीनों चले शायर, सिंह, सपूत’ का उदाहरण देते हुए कहा कि महान कवियों ने तभी यश पाया, जब उन्होंने लीक तोड़ी।
इसके अलावा रशीदन बीवी मंच पर ‘हमारे सपनों का समाज और बाल साहित्य’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस पर्चिा में वरिष्ठ कवि आलोक धन्वा और अरुण कमल ने हिस्सा लिया।
इधर, कस्तूरबा मंच पर नवोदित कवयित्रियों के लिए कविता पाठ का आयोजन किया गया। इस मौके पर रुचि ने अपनी पहली कविता ‘जिंदगी’ सुनाई। इसके बाद उन्होंने ‘तू नाारी है’ तथा ‘वह खामोशी का पहर’ शीर्षक कविता सुनाई।
इसके बाद आभा ने मंच संभाला और अपनी ‘लड़की की शक्ल में’ और ‘तड़पती निगाहें’ शीर्षक अपनी कविता सुनाकर माहौल को खशनुमा बना दिया। इसके बाद नेहा नुपूर ने भोजपुरी भाषा में ‘मनवा में बसल बिहार’ कविता सुनाई, जिसका दर्शकों ने भी खूब आनंद लिया। इसके बाद स्निग्धा ने ‘चुप्पी’ और ‘हम ठगे जा रहे हैं’ शीर्षक कविता सुनाई।
इसके अलावा भी कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। दो दिसंबर को शुरू यह पुस्तक मेला 11 दिसंबर तक चलेगा। इस पुस्तक मेले में 210 स्टॉल लगाए गए हैं तथा मेले में बिहार और देशभर के 112 प्रकाशक भाग ले रहे हैं।
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