शिवपाल ने जारी बयान में कहा है कि सहकारी निर्वाचन कार्यक्रम घोषित होने के बाद सहकारी समितियों के आधारभूत सिद्धांत में परिवर्तन करना सरकार की विवशता एवं हताशा को दर्शाता है तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सरकार के त्रिरस्कार पूर्ण आचरण को प्रदर्शित करता है। सहकारी निर्वाचन आयोग एवं राज्य सरकार ने समय से सहकारी समितियों के निर्वाचन कराने की विफलता को छुपाने के लिए अध्यादेश के माध्यम से जनता की आवाज को दबाने व कुचलने का कुत्सित प्रयास किया है।
शिवपाल ने कहा कि सरकार द्वारा जल्दबाजी में जारी अध्यादेश नियम के विरुद्ध और औचित्यहीन है।
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