कला के व्यावसायीकरण से उभरती हैं नई प्रतिभाएं : सतीश गुजराल (साक्षात्कार)

नई दिल्ली, 10 दिसंबर (आईएएनएस)। कला बाजार के व्यापक व्यावसायीकरण पर दिग्गज चित्रकार जतिन दास समेत कई बड़े कलाकारों ने निराशा जताई है, लेकिन समकालीन भारतीय कला के अगुआ सतीश गुजराल का मानना है कि व्यावसायीकरण नई प्रतिभा के उत्थान को भी प्रेरित करता है।

नई दिल्ली, 10 दिसंबर (आईएएनएस)। कला बाजार के व्यापक व्यावसायीकरण पर दिग्गज चित्रकार जतिन दास समेत कई बड़े कलाकारों ने निराशा जताई है, लेकिन समकालीन भारतीय कला के अगुआ सतीश गुजराल का मानना है कि व्यावसायीकरण नई प्रतिभा के उत्थान को भी प्रेरित करता है।

गुजराल ने कहा कि व्यावसायीकरण का प्रभाव निश्चित रूप से जागरूकता के रूप में भी हुआ है। हाल ही में गुजराल की मूर्तिकला ‘ट्रिनिटी’ को बीकानेर हाउस में प्रदर्शित किया गया था।

कला की दुनिया में सम्मानित व्यक्ति 91 वर्षीय गुजराल (पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के छोटे भाई) ने एक साक्षात्कार में आईएएनएस को बताया, “यह सच है कि कला का बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण हुआ है, लेकिन इसने नई प्रतिभा के उत्थान को भी प्रेरित किया है। हालांकि, व्यावसायीकरण (व्यापार) और (उखड़ी हुई) कला में प्रामाणिक प्रतिभा ने उद्योग जगत में कुछ जागरूकता भी पैदा की है।”

उन्होंने विस्तार से बताया कि कला हमेशा हमारी संस्कृति का एक मजबूत पक्ष रही है। उन्होंने कहा, “यह हर जगह थी, मंदिरों के साथ-साथ शाही अदालतों में। इसे कहानियों को गढ़ने के लिए एक उत्कृष्ट माध्यम भी माना जाता है, जो वर्णन के लायक होती है।”

पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित कलाकार ने कहा, “आज भी, कलाकारों में बहुत प्रतिभा है। वे अपने ख्याल या कल्पनाओं को दुनिया के सामने असाधारण चित्रों के माध्यम से व्यक्त करते हैं। प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, कमी है तो दुनिया के साथ संवाद करने के सही मंच की।”

सतीश गुजराल के बड़े भाई, इंद्र कुमार गुजराल, भारत के 13वें प्रधानमंत्री थे। इंद्र 1997-98 में 11 महीनों के लिए प्रधानमंत्री रहे थे।”

सतीश गुजराल ने एक ऐसे समाज की आशा की, जहां लोग कला को समझें। बीकानेर हाउस में ‘ट्रिनिटी’ को प्रदर्शित किए जाने पर उन्होंने कहा, यह जनता को कला की तरफ लाने के लिए बस एक शुरुआत थी।

विख्यात कलाकार और मूर्तिकार ने कहा, “मुझे आशा है कि निकट भविष्य में एक समय आएगा, जब जनता सभी तरह की कला को देखने के लिए उपलब्ध होगी। और तब यह जीवन और संचार का एक तरीका बन जाएगा।”

गुजराल ने ‘ट्रिनिटी’ को त्रिफलक के रूप में डिजाइन किया था। दिग्गज कलाकार ने ‘ट्रिनिटी’ को तब बनाया था, जब उनकी बेटी रसेल ने एक स्थानिक डिजाइनर के रूप में तीन दशक पूरे किए थे। इसका अनावरण सितंबर माह में एक निजी समारोह में किया गया था।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में चित्रकारी, मूर्तिकला और वास्तुकला को अलग-अलग नहीं देखा जाता था, बल्कि सभी को कला की शाखाओं के रूप में माना जाता था।

उन्होंने कहा, “यह सब अब अलग-अलग रूपों में जुदा हो चुकी हैं। आज कुछ लोग चित्रों को समझने का दावा करते हैं, लेकिन वे आर्किटेक्चर नहीं हैं। मुझे इमारत का खाका बनाने के लिए कभी डिग्री प्राप्त करने की जरूरत महसूस नहीं हुई।

गुजराल ने राजधानी दिल्ली स्थित बेल्जियम दूतावास को डिजाइन किया है, जो एक कला-वास्तुकला का जटिल नमूना हो सकता है।

उन्होंने कहा, “मुझसे अक्सर कहा गया कि जिन भवनों को मैंने डिजाइन किया है, वे मूर्तियों के समान हैं।”

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