नई दिल्ली, 20 दिसम्बर (आईएएनएस)। आर्थिक मामलों की संसदीय समिति (सीसीईए) ने बुधवार को संगठित क्षेत्र में कताई और बुनाई को छोड़कर कपड़ा क्षेत्र की समूची मूल्य श्रृंखला को शामिल करते हुए एक नई कौशल विकास योजना को मंजूरी दे दी है, जिसे ‘कपड़ा क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना (एससीबीटीएस)’ नाम दिया गया है।
इस योजना को 1300 करोड़ रुपये के लागत-खर्च के साथ 2017-18 से लेकर 2019-20 तक की अवधि के लिए स्वीकार किया गया है। आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
बयान में कहा गया है कि इस योजना में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सामान्य मानकों के आधार पर राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप प्रशिक्षण पाठ्यक्रम होंगे।
बयान में कहा गया है कि योजना का उद्देश्य संगठित कपड़ा क्षेत्र और उससे जुड़े क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने के संबंध में उद्योग के प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए मांग आधारित, प्लेसमेंट संबंधी कौशल कार्यक्रम, कपड़ा मंत्रालय के संबंधित संगठनों के माध्यम से कौशल विकास और कौशल उन्नयन को प्रोत्साहन देना तथा देशभर के हर वर्ग को आजीविका प्रदान करना है।
मंत्रालय ने कहा कि यह योजना देशभर में समाज के सभी वर्गों के लाभ के लिए लागू की जाएगी, जिसमें ग्रामीण, दूर-दराज के इलाके, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र, पूर्वोत्तर तथा जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। योजना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगों, अल्पसंख्यकों और अन्य कमजोर वर्गों को वरीयता दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि 12वीं योजना के दौरान कपड़ा मंत्रालय के द्वारा क्रियान्वित कौशल विकास की तत्कालीन योजना के तहत 10 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया है। इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं थीं। इस योजना के तहत परिधान उद्योग एक प्रमुख क्षेत्र है, जिसके बारे में माना जाता है कि उसमें लगभग 70 प्रतिशत महिलाओं को रोजगार मिलता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए योजना में इसे शामिल किया गया है।
मंत्रालय ने कहा कि आशा कि जाती है कि योजना के जरिए कपड़ा क्षेत्र से संबंधित विभिन्न वर्गों में 10 लाख लोगों का कौशल विकास होगा और उन्हें प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। इनमें से एक लाख लोग परम्परागत क्षेत्रों में होंगे।
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