अभिनय कला सिखाई जा सकती है : मनोज बाजपेयी

अरुंधती बनर्जी

अरुंधती बनर्जी

मुंबई, 28 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता अभिनेता मनोज बाजपेयी का कहना है कि अभिनय की कला सिखाई जा सकती है, लेकिन इसके लिए सीखने वाले के अंदर बेचैनी व जुनून होना चाहिए।

मनोज जल्द ही नीरज पांडे की फिल्म ‘अय्यारी’ में नजर आएंगे।

यह पूछे जाने पर कि क्या अभिनय सीखा जा सकता है या यह जीवन के अनुभवों से आता है, मनोज ने कहा, “मुझे लगता है कि अभिनय की कला सीखी जा सकती है। हां, ऐसा बहुत कुछ है, जिसे हम जीवन के अनुभवों से सीखते हैं और कुछ हद तक जन्मजात प्रतिभा भी होती है, लेकिन अभिनय प्रतिभा और कला का मिश्रण है।”

मनोज, जिन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में कई बार आवेदन किया, लेकिन उनके आवेदन को ठुकरा दिया गया, उन्होंने कहा कि वह ऐसे कई औसत कलाकारों को जानते हैं, जिन्होंने इस कला को सालों की मेहनत के साथ सीखा। वे अपनी मंजिल पाने में कामयाब रहे और इसलिए हम एनएसडी या भारतीय एवं टेलीविजन संस्थान जाते हैं। इस कला में माहिर हस्तियां वहां (संस्थान) जाकर युवाओं को अभिनय की सीख देती हैं।

अभिनेता ने कहा, “मेरा मानना है कि कोई भी आपको अभिनय तभी सिखा सकता है, जब आपमें इसे सीखने का जुनून हो..अभिनय जुनून से आता है।”

फिल्म ‘अय्यारी’ में मनोज ने युवा अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ पर्दा साझा किया है। वह सिद्धार्थ की सीखने में दिलचस्पी से बेहद प्रभावित हैं।

मनोज ने बताया कि बैरी जॉन से अभिनय की सीख लेने के बाद 26 साल की उम्र से वह एक्टिंग वर्कशाप (अभिनय कार्यशाला) संचालित कर रहे हैं और जब सिद्धार्थ ने उन्हें फोन किया और अभिनय की कला के बारे में और ज्यादा जानने की दिलचस्पी दिखाई तो उन्हें बहुत खुशी हुई।

फिल्म ‘अय्यारी’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसकी कहानी दो अलग-अलग पीढ़ियों की विचारधारा के बीच और एक मार्गदर्शक और संरक्षक के इर्द-गिर्द घूमती है। ये दोनों किरदार जिसे वह और सिद्धार्थ निभा रहे हैं, कहानी का जीवन व आधार हैं।

नीरज पांडे के साथ मनोज इससे पहले ‘स्पेशल-26’, ‘सात उचक्के’ और ‘नाम शबाना’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं।

अभिनेता ने बताया कि नीरज के साथ उनकी घनिष्ठता बढ़ती जा रही है। सेट से इतर भी हम अपने विचार और राय साझा करते हैं।

फिल्म ‘अय्यारी’ नौ फरवरी को रिलीज हो रही है।

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