मुंबई, 1 फरवरी (आईएएनएस)। भारत के विनिर्माण क्षेत्र में कारोबारी परिस्थितियों में जनवरी में सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन इसकी वृद्धि दर में गिरावट आई है। प्रमुख आर्थिक आंकड़ों से गुरुवार को यह जानकारी मिली।
इसके परिणामस्वरूप, निक्केई इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) में साल 2017 के दिसंबर में 54.7 फीसदी से गिरकर 52.4 फीसदी हो गया।
इस सूचकांक में 50 से अधिक का अंक तेजी का और 50 से कम अंक गिरावट का सूचक है।
आईएचएस मार्किट की अर्थशाी और रिपोर्ट की लेखिका आशना डोढिया ने बताया, “दिसंबर के तेज प्रदर्शन के बाद, भारतीय विनिर्माण अर्थव्यवस्था का आवेग कम हुआ है। इसके कारण नए आर्डर, रोजगार और उत्पादन में गिरावट आई है।”
उन्होंने कहा, “हालांकि, प्रमुख क्षेत्रों में रिकवरी का संकेत मिला है।”
डोढिया के मुताबिक, नए निर्यात आर्डरों में, साल 2016 के सितंबर के बाद से तेजी आई है।
डोढिया ने कहा, “102 वस्तुओं की ड्यूटी में संशोधन से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारत अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा और इससे विदेशों से मांग में संभवत: आनेवाले महीनों में तेजी आएगी।”
उन्होंने कहा, “वहीं, दूसरी तरफ वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कुछ हद व्यापार प्रदर्शन के लिए खतरा बना हुआ है, क्योंकि कंपनियां को देरी से भुगतान का सामना करना पड़ रहा है।”
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