दलाई लामा ने भारत की धर्मनिरपेक्षता को सराहा

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने सांप्रदायिक सौहाद्र्र बनाए रखने में भारत के प्रयासों की रविवार को सराहना की और कहा कि देश अपनी धर्मनिरपेक्षता बनाए रखने के लिहाज से खास है।

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने सांप्रदायिक सौहाद्र्र बनाए रखने में भारत के प्रयासों की रविवार को सराहना की और कहा कि देश अपनी धर्मनिरपेक्षता बनाए रखने के लिहाज से खास है।

दलाई लामा ने कहा, “भारत धर्मनिरपेक्ष परंपरा का पालन करता है, यह सभी धर्मो का आदर करता है और साथ ही धर्म न मानने वालों का भी समान आदर करता है, जो कि अपने आप में अनोखा है। यह देश की महानता है कि भिन्न-भिन्न धर्म एकसाथ चल रहे हैं, वह भी भाईचारगी की भावना के साथ।”

दलाई लामा यहां तीन मूर्ति भवन में स्थित नेहरू मेमोरियल म्युजियम एंड लाइब्रेरी में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद के सहयोग से आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा, “भारतीय सभ्यता ने सबसे महान विचारक और दार्शनिक पैदा किए हैं। भारतीय समुदाय को यह स्पष्ट कर देना चाहिए धार्मिक सौहाद्र्र संभव है।”

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता ने अन्य देशों में मजबूत भारतीय समुदाय बनाने पर भी जोर दिया और कहा कि प्रवासियों को अन्य देशों में इंडिया टाउन बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिस तरह से चीनी नागरिकों ने दूसरे देशों में चाइना टाउन बनाया है।

दलाई लामा ने कहा, “दूसरे देशों में जब भी मेरी मुलाकात भारतीयों से होती है, मैं उन्हें उनकी संस्कृति और परंपरा को संरक्षित करने का हमेशा सुझाव देता हूं। भारतीय समुदाय को अपनी संस्कृति के बारे में दूसरों को जानकारी देने के लिए सक्रिय रहना चाहिए, उनकी ये जिम्मेदारी है कि वे सदियों पुरानी अपनी परंपराओं को बढ़ावा दें।”

दलाई लामा ने तिब्बत के बारे में कहा कि चीनी संविधान ने खास इलाकों को तिब्बत के रूप में मान्यता दी है और इन इलाकों को अपनी भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने का भी अधिकार होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि दलाई लामा मार्च 1959 में तिब्बत से भागकर भारत आ गए थे। तिब्बत की निर्वासित सरकार हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में स्थित है।

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