गेहूं क्रय केंद्रों के आस-पास बिचौलियों के अड्डे : अखिलेश

उन्होंने कहा कि क्रय केंद्र प्रभारियों से सांठगांठ कर बिचौलिये औने-पौने दाम पर गेहूं खरीद कर क्रय केंद्रों को बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आईपीएन से बातचीत में कहा कि गेहूं क्रय केंद्रों पर किसानों से 60 से 80 रुपये तक खर्च के नाम पर पल्लेदारी, उतराई आदि के नाम पर वसूले जा रहे हैं। क्रय केंद्र प्रभारी बिचौलिये के साथ मिलकर किसानों का समर्थन मूल्य 1735 की जगह 1500 से कम रुपये में गेहूं खरीदकर किसानों का शोषण कर रहे हैं।

अखिलेश ने कहा कि क्रय केंद्रों पर किसानों के लिए न पीने का पानी की व्यवस्था है और नहीं तपती धूप से बचाव के लिए छाया है। गरीब कमजोर किसान गेहूं लेकर क्रय केंद्रों पर जाता है तो बताया जाता है कि बोरे नहीं हैं। किसान को मजबूर होकर बाजार में बिचैलियों को अपना गेहूं बेचना पड़ता है। कई जनपदों में तो क्रय केंद्र पहले ही बंद हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री स्वयं स्थिति से पूरी तरह अनजान बने हुए हैं। मुख्यमंत्री को जब कोई काम करना ही नहीं है तो गांवों मे चौपाल के बहाने किसानों को गुमराह करने का उन्होंने एक तरीका ढूंढ़ निकाला है। लेकिन किसानों की दिलचस्पी किसी गांव में एक रात सोने वाली सरकार में नहीं है, उन्हें सतत जागरूक सरकार चाहिए जो कृषि की समस्याओं का समाधान कर सके।

अखिलेश ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार के चार वर्ष और राज्य की भाजपा सरकार के एक वर्ष में किसानों को सिर्फ धोखा ही हाथ लगा है। क्या किसानों की आय 2022 तक दुगुना करने का यही मंत्र है?

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