पटना, 11 मई (आईएएनएस)। बिहार के युवा निर्देशक अमरज्योति झा की लघुफिल्म ‘पुनर्जन्म’ झारखंड अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव में दिखाई जाएगी। यह फिल्मोत्सव 25 से 27 मई तक चलेगा। इस फिल्म को इससे पहले पुणे अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव में खूब सराहना मिली थी।
मानवीय संवेदनहीनता, झूठे आदर्शो और पाखंड को दर्शाती इस फिल्म में झा ने खुद अभिनय भी किया है। इस फिल्म की शूटिंग उन्होंने बनारस की गलियों के अलावा वहां के मणिकर्णिका घाट और पटना में की है।
तीन दिवसीय प्रथम झारखंड अंतर्राष्ट्रीयफिल्म महोत्सव का आयोजन रांची के खेलगांव स्थित मेगा स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में 25 से 27 मई तक होगा।
झा इससे पहले स्टार प्लस के सुपर हिट शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’, ‘सावधान इंडिया’ जैसे धारावाहिक में भी एसोसिएट डायरेक्टर के रूप में काम कर चुके हैं।
पुणे के बाद झारखंड फिल्मोत्सव में नामांकित होने के बाद झा ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया कि फिल्म ‘पुनर्जन्म’ की कहानी का पात्र एक भूखा व्यक्ति है, जिसे अपने भोजन के लिए कई संघर्षो और पीड़ाओं से गुजरना पड़ता है। वह व्यक्ति बूढ़े आदमी के अंतिम संस्कार में शामिल लोगों के द्वारा फेंके जा रहे पैसे को चुनकर, एक श्मशान तक पहुंच जाता है और वहां अपने भोजन की खोज में व्यस्त हो जाता है।
अंतिम संस्कार के बाद गंगा नदी में फेंके जाने वाली बेकार चीजों को भी उसे खाने नहीं दिया जाता है। वहां से भी उसे भगा दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि कठिन संघर्षों के बाद भोजन तो उसे मिलता है, मगर वह खाना इंसान के लिए नहीं होता।
उन्होंने बताया कि गाय के मूत्र के साथ अपनी प्यास को खत्म करने और गाय के भूसे से भूख को खत्म करने की प्रक्रिया में लोग उसे एक महान संत, महात्मा या दिव्य व्यक्ति के रूप में समझने लगते हैं और भगवान की तरह उसकी पूजा करना शुरू कर देते हैं, लेकिन भूखा व्यक्ति इन सभी चीजों से अवगत नहीं है। वह अपने आप को असहाय और अकेला ही समझता है।
झा के अनुसार, “यह फिल्म मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली फिल्म है।”
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