पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमेश दीक्षित ने आईपीएन को भेजे अपने बयान में कहा कि सूबे में खेती-किसानी की दशा बिगड़ रही है। खाद, बीज, बिजली, नहरों को पानी नहीं मिल रहा है, फसल का लाभकारी मूल्य छलावा साबित हो रहा है और किसान भुखमरी व खुदकुशी के कगार पर पहुंच रहा है। बजट में भी किसान व मजदूर की उपेक्षा की गई है और उन्हें झूठा आश्वासन देकर गुमराह किया गया है।
दीक्षित ने कहा कि प्रदेश में कानून नाम की कोई चीज नहीं रह गई है, अपराधियों को संरक्षण मिल रहा है, निर्दोष लोगों को बदमाश बताकर फर्जी मुठभेड़ों में उनकी हत्या करवाई जा रही है। जैसा गुजरात में होता रहा है, वही सब यहां दोहराया जा रहा है। सरकार संघ के फ्रंटल संगठन चला रहे हैं।
भीम आर्मी के सहारनपुर जिला अध्यक्ष कमल सिंह वालिया के भाई सचिन वालिया के हत्या पर रोष प्रकट करते हुए डॉ. दीक्षित ने कहा कि सहारनपुर समेत पूरे प्रदेश में सामंती अपराधियों को योगी सरकार का खुला संरक्षण प्राप्त है, दूसरी तरफ इंसाफ के लिए संघर्षरत लोगों के खिलाफ सत्ता संरक्षण में हमले हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राकांपा पूरे सूबे में इंसाफ पसंद तंजीमों और दलों के साथ मिलकर सचिन वालिया की हत्या का प्रतिरोध करेगी।
डॉ. दीक्षित ने कहा कि भीम आर्मी के नेताओं पर रासुका लगाकर उन्हें जेल में बंद किया जाना एक रणनीति का हिस्सा है। सरकार की मंशा यह है कि नाइंसाफी के खिलाफ कोई बोले नहीं, दूसरी तरफ सहारनपुर सहित पूरे सूबे में शासन-प्रशासन अपराधियों को न सिर्फ बचा रहा है, बल्कि उनके सहयोगी की भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में योगी सरकार के आने से पूरा सूबा सांप्रदायिक और जातीय दंगों में उलझकर रह गया है। सत्तापक्ष और आरएसएस के इशारे पर पुलिस चिन्हित कर मुसलमान और दलितों को निशाना बना रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दुख की घड़ी में भीम आर्मी के नेताओं के साथ खड़ी है।
डॉ. दीक्षित ने कहा कि उन्होंने जिला इकाइयों को इस बाबत निर्देशित किया है कि पार्टी कार्यकर्ता सपा व रालोद उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाएं, संयुक्त सभाएं करें, नुक्कड़ मीटिंग और पर्चे-पोस्टर के माध्यम से कैराना और नूरपुर उपचुनाव के दोनों उम्मीदवारों की जीत और सांप्रदायिक शक्तियों को हराने में तन-मन-धन से जुट जाएं।
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