नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा निदेशक की तरफ से जारी एडवाइजरी को लोगों को खुश करने के लिए की गई कवायद बताया है और कहा है कि इससे रोगी की सुरक्षा और देखभाल की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
आईएमए की तरफ से जारी एक बयान के अनुसार, संस्था के अध्यक्ष डॉ. रवि वानखेडकर ने कहा है, “यह एडवाइजरी कठोर है और इसमें उचित अनुसंधान और समझ की कमी है। दिल्ली में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने और इसमें सुधार करने के बजाय, सरकार व्यवहारिकता पर ध्यान दिए बगैर ऐसी एडवाइजरी जारी करके निजी स्वास्थ्य देखभाल को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।”
उन्होंने कहा, “यदि स्वास्थ्य देखभाल की लागत के केवल विशिष्ट पहलुओं पर बात की जाएगी तो स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने में कुल लागत पर विचार किए बिना इस संबंध में लिए जाने वाले निर्णय अस्पष्ट होंगे और इसके गलत निष्कर्ष निकाले जाएंगे और ऐसा करना एक बड़ी गलती है।”
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय अग्रवाल ने कहा, “हालांकि एनएलईएम और नॉन-एनएलईएम दवाओं पर एडवाइजरी एक अच्छा कदम है, फिर भी सरकार को एनएलईएम श्रेणी में सभी महंगी दवाओं और डिस्पोजेबल को भी लाना चाहिए। इनडोर और आउटडोर रोगियों के लिए फार्मेसियों, नर्सिग होमों और अस्पतालों में इन दवाओं की उपलब्धता बढ़ाई जानी चाहिए। इन दवाओं, यहां तक कि नॉन-एनएलईएम श्रेणी की दवाओं की खरीद कीमतों के लिए सार्वभौमिक नियम बनाना एक सराहनीय कदम होगा। एक कंपनी, एक नमक, एक दवा और एक मूल्य की नीति के प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर देने पर इस समस्या का हल निकल आएगा।”
बयान के अनुसार, आईएमए आपातकालीन और महत्वपूर्ण मामलों को छोड़कर अन्य मामलों में इन-हाउस फार्मेसी से दवाएं खरीदने के लिए अपने मरीजों को मजबूर नहीं करने की नीति के लिए प्रतिबद्ध है।
आईएमए के महासचिव डॉ. आर. एन. टंडन ने कहा, “हेल्थकेयर में उच्च जोखिम वाले पैकेजों में 20 प्रतिशत अधिक चार्ज करना एक हास्यास्पद प्रस्ताव है। अगर अस्पताल पहुंचने के बाद अस्पताल के आपातकालीन कमरे/कैजअल्टी विभाग में छह घंटे के भीतर ही मरीज की मौत हो जाए, तो अस्पताल कुल बिल में से 50 प्रतिशत की छूट देगा। रोगी के अस्पताल आने के छह से 24 घंटे के बीच होने वाली किसी भी मौत पर अस्पताल कुल बिल में 20 प्रतिशत की छूट देगा। लेकिन इस बात का कोई तर्क नहीं है कि इसके लिए उपभोक्ता के द्वारा अस्पताल में रहने की अवधि के बजाय इलाज की अवधि के दौरान प्रदान की गई सेवाओं के लिए भुगतान किये जाने वाले सेवा शुल्क को आधार बनाया जाए।”
बयान के अनुसार, चिकित्सकीय लापरवाही के मामले में, आईएमए समेत सभी हितधारकों के परामर्श से सरकार के द्वारा एक मानक ऑपरेटिव सिस्टम को विकसित करने की जरूरत है, जिसका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।
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