शतरंज में भी लीग शुरू हो : हरिका द्रोणावल्ली (साक्षात्कार)

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। भारत की ग्रैंड मास्टर और शीर्ष महिला खिलाड़ी हरिका द्रोणावल्ली ने जोर देकर कहा है कि अन्य खेलों की तरह देश में शतरंज में भी लीग शुरू होनी चाहिए क्योंकि इस खेल को भी जनमानस में लोकप्रिय बनाने की जरूरत है और लीग इसमें काफी हद तक मदद कर सकती है।

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। भारत की ग्रैंड मास्टर और शीर्ष महिला खिलाड़ी हरिका द्रोणावल्ली ने जोर देकर कहा है कि अन्य खेलों की तरह देश में शतरंज में भी लीग शुरू होनी चाहिए क्योंकि इस खेल को भी जनमानस में लोकप्रिय बनाने की जरूरत है और लीग इसमें काफी हद तक मदद कर सकती है।

हरिका पिछले साल अक्टूबर में तुर्की में बेतुमी शतरंज क्लब जॉर्जिया टीम का हिस्सा थीं जहां टीम ने यूरोपियन कप का खिताब जीता था। भारत से एकमात्र महिला खिलाड़ी हरिका उस लीग में छह मैचों में से सभी में ड्रॉ खेले थे।

हरिका ने आईएएनएस के साथ एक साक्षात्कार में कहा, “निश्चित रूप से, भारत में भी अन्य खेलों की तरह शतरंज में भी लीग शुरू होनी चाहिए ताकि शतरंज के खिलाड़ियों को भी लोग जान सके और इसमें अधिक से अधिक खिलाड़ी हिस्सा ले सके। इससे इस खेल को काफी समर्थन मिलेगा। सिर्फ शतररंज ही नहीं,अन्य कोई भी खेलों में अगर लीग शुरू होती है तो लोगों की इसमें काफी दिलचस्पी होगी।”

27 साल की हरिका ने 2012, 2015 और 2017 में महिला विश्व शतरंज चैंपियनशिप में अब तक तीन बार कांस्य पदक जीते हैं। उनके इस शानदार उपलब्धि के लिए उन्हें 2007-08 में भारत सरकार से अर्जुन अवार्ड भी मिल चुका हैं।

उन्होंने कहा, “देश में शतरंज के खिलाड़ियों की कमी नहीं है। युवा स्तर से लेकर सीनियर तक बहुत सारे खिलाड़ी हैं जिन्होंने एशियाई चैंपियनशिप और विश्व चैंपियनशिप में खिताब जीते हैं। हमने एशियाई खेलों में दो बार पदक जीता है।”

महिला शतरंज खिलाड़ी ने कहा, “चिंता की बात यह है कि हम जितनी सफलता अर्जित कर रहे हैं, हमें उतनी मान्यता नहीं मिल पा रही है। जो खिलाड़ी इस खेल में पदक जीतते हैं तो उसे अन्य खेलों की तुलना में उतना अधिक महत्व नहीं दिया जाता है। शतरंज में खिलाड़ियों की कमी नहीं है लेकिन अगर मीडिया और सरकार का और ज्यादा सहयोग मिलेगा तो हम और अधिक अच्छा करेंगे।”

हरिका ने 2016 में चीन में फीडे महिला ग्रां प्री का खिताब जीता था जिसकी बदौलत वह विश्व रैंकिंग में 11वें नंबर से पांचवें नंबर पर पहुंची थी। उन्होंने 2010 में ग्वांग्झू एशियाई खेलों में व्यक्तिगत स्पर्धा में देश के लिए कांस्य पदक अपने नाम कर चुकी है।

अपने अगले लक्ष्य के बारे में पूछे जाने पर हरिका ने कहा, “अभी मैं वर्ल्ड नंबर-1 बनने की कोशिश कर रही हूं। अगस्त के बाद कई सारे टूर्नामेंट शुरू होने वाले हैं। विश्व चैंपियनशिप के लिए मैं अभी से ही तैयारी कर रही हूं और मेरी पूरी कोशिश होगी कि मैं इसमें अच्छा करूं।”

उन्होंने कहा, “इस खेल में मेरे कोच और माता-पिता ने मेरी बहुत मदद की। मैं आज जो भी हूं उन्हीं की बदौलत हूं। हर खेल में शुरू में परेशानियां होती है और मुझे भी हुई। लेकिन मैंने इसे चुनौतियों के रूप में लिया। इस दौरान मुझे जो अनुभव मिला, उसी की बदौलत मैं आज यहां हूं।”

शतरंज में ज्यूरिक पॉल्कर और क्रिकेट में भारतीय कप्तान विराट कोहली को अपना आदर्श मानने वाली हरिका 2016 में इंडियन ऑयल से जुड़ी थी और इसी की मदद से अपने खेल को आगे बढ़ा रही है।

आंध्र प्रदेश की रहने वाली हरिका ने कहा, “इंडियन ऑयल कंपनी ने मेरे प्रदर्शन को देखकर मुझे स्कॉरलरशिप देने का फैसला किया, वह भी बिना किसी कागज के। मुझे लगता है कि सरकार ही सबकुछ नहीं कर सकती है और लेकिन इस तरके के संगठन की मदद से देश में खेलों और खिलाड़ियों का बहुत विकास हुआ है।”

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