जाकिर नाईक पर भारत की मांग के दबाव में नहीं आएगा मलेशिया : प्रधानमंत्री

पुत्राजया (मलेशिया), 10 जुलाई (आईएएनएस)। मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद ने मंगलवार को कहा कि वह भारत के विवादित मुस्लिम उपदेशक जाकिर नाईक को आसानी से महज इसीलिए नहीं प्रत्यर्पित कर देंगे क्योंकि भारत ऐसा चाहता है।

न्यूज स्ट्रेट टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, महाथिर मोहम्मद ने कहा कि उनकी सरकार हमेशा सुनिश्चित करेगी कि वह इस तरह की किसी मांग पर प्रतिक्रिया देने से पहले सभी कारकों पर विचार करें, ‘अन्यथा कोई पीड़ित बन जाएगा।’

उन्होंने कहा, “हम आसानी से दूसरे की मांगों का पालन नहीं करते हैं। हमें अपना जवाब देने से पहले सभी कारकों को देखना चाहिए।”

प्रधानमंत्री से यह पूछा गया था कि क्या उनके गठबंधन की कुछ पार्टियां मुस्लिम उपदेशक को निष्कासित करना चाहती हैं।

जाकिर नाईक वर्तमान में मलेशिया का स्थायी निवासी है। वह धनशोधन व आतंकी संपर्क के आरोपों में भारत सरकार द्वारा वांछित है।

डेमोक्रेटिक एक्शन पार्टी (डीएपी) के नेता रामासामी पलनीसामी ने कहा कि उन्हें भारत और मलेशिया के बीच किसी गुप्त समझौते का शक है।

मोहम्मद ने बीते सप्ताह कहा था कि धर्मगुरु को भारतीय अधिकारियों को नहीं सौंपा जाएगा क्योंकि उसे मलेशिया में स्थायी निवासी का दर्जा दिया गया है।

उन्होंने कहा कि नाईक को मलेशिया में रहने की इजाजत होगी जब तक कि वह कोई समस्या नहीं खड़ी करता।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि कई समूहों को महाथिर का फैसला सही नहीं लग रहा है। वे सरकार पर नाईक के कथित तौर पर नस्ली व धार्मिक असंवेदनशील बयानों की प्रवृत्ति को लेकर उसे भारत को लौटाने पर जोर दे रहे हैं।

यह कहा जा रहा है कि भारत ने जाकिर नाईक को लौटाने का औपचारिक रूप से आग्रह किया है। भारत ने नाईक पर अपने नफरत वाले भाषणों से युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसाने का आरोप लगाया है।

नाईक ने आरोप लगाया है कि भारतीय मीडिया बीते दो वर्ष से उसे बदनाम करने में लगा हुआ है।

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