नामवर सिंह के स्वस्थ रहने का राज पढ़ते-लिखते रहना : काशीनाथ सिंह

नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। प्रसिद्ध कथाकार और प्रख्यात समालोचक नामवर सिंह के छोटे भाई काशीनाथ सिंह ने यहां शनिवार को कहा कि नामवरजी के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र का पहला राज है उनका पढ़ना और लिखना। जब तक वे पढ़ सकते हैं, तब तक वे स्वस्थ रहेंगे।

काशीनाथ ने कहा, “उनके स्वास्थ्य का दूसरा बड़ा राज है-विरोध सुनते रहना। विरोध से वे ताकत पाते हैं। उन्हें लोकप्रियता पसंद है। लोकप्रियता पर बने रहना पसंद है। यह केवल अध्यापन करते हुए संभव नहीं था। आलोचकों में भी ऐसी लोकप्रियता किसी को नहीं मिली जैसी नामवरजी को मिली है।”

समकालीन हिंदी आलोचना को नई ऊंचाइयां देने वाले नामवर सिंह के 92वें जन्मदिन के अवसर पर राजकमल प्रकाशन द्वारा ‘नामवर संग बैठकी’ का आयोजन शनिवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया गया। इस गोष्ठी में नामवर सिंह के साथ प्रमुख साहित्यकार विश्वनाथ त्रिपाठी, काशीनाथ सिंह, पुरुषोत्तम अग्रवाल, गोपेश्वर सिंह एवं संजीव कुमार शामिल हुए।

राजकमल प्रकाशन समूह के निदेशक अशोक माहेश्वरी ने कहा, “नामवरजी राजकमल परिवार के मुखिया हैं और हमें उनका 92वां जन्मदिन मनाते हुए बेहद खुशी हो रही है।” इस मौके पर उन्होंने नामवर सिंह की आगामी चार पुस्तकों की भी घोषणा की।

‘रामविलास शर्मा’, ‘छायावाद : प्रसाद, निराला, महादेवी और पंत’, ‘द्वाभा’ और ‘आलोचना अनुक्रमणिका’ इन चार आगामी पुस्तकों की घोषणा इस आयोजन में की गई। इनका संपादक डॉ. नीलम सिंह, विजय प्रकाश सिंह, ज्ञानेंद्र कुमार संतोष और शैलेश मटियानी ने किया है। इस मौके पर किताबों की एक झलक भी दिखलाई गई।

कार्यक्रम में नामवर सिंह ने कहा, “आचार्य रामचंद्र शुक्ल के बाद हिंदी के सबसे बड़े समालोचक रामविलास शर्मा हैं। रामविलास शर्मा कट्टरपंथी प्रगतिशील समालोचक थे, उदारवादी प्रगतिशीलों और कट्टरपंथी प्रगतिशीलों में बहस चलती रहती थी। बाद में रामविलासजी ने वेदों पर भी काम किया। मुझे आगरा में काम करते हुए रामविलासजी को जानने का मौका मिला था, इसलिए मैंने उन पर यह काम किया है।”

लेखक विश्वनाथ त्रिपाठी ने उन्हें अ™ोय के बाद हिंदी का सबसे बड़ा ‘स्टेट्समैन’ कहा। पुरुषोत्तम अग्रवाल ने हिंदी साहित्य और आलोचना के बड़े नाम के रूप में नामवरजी को भाषणों में एकदम अलग व्यक्तित्व वाला और कक्षा में बिल्कुल अलग व्यक्तित्व वाला बताया। विश्वनाथ त्रिपाठी ने अपने विद्यार्थी जीवन के अनेक संस्मरण उद्धृत किए।

लेखक गोपेश्वर सिंह ने कहा, “नामवर सिंह ने अपने दौर में देश का सर्वोच्च हिंदी विभाग जेएनयू में बनवाया, हमने और हमारी पीढ़ी ने नामवरजी के व्यक्तित्व से बहुत कुछ सीखा है।”

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493