मप्र : अध्यापक राजपत्र पढ़कर हुए मायूस

भोपाल, 31 जुलाई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश सरकार ने पंचायत एवं नगरीय निकाय के अध्यापक संवर्ग के कर्मचारियों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किए जाने के फैसले को राजपत्र (गजट) में प्रकाशित करा दिया है, मगर अध्यापक वर्ग राजपत्र में उल्लिखित सुविधाओं से संतुष्ट नहीं है।

आधिकारिक तौर पर जारी विज्ञप्ति में मंगलवार को बताया गया कि पंचायत अध्यापक संवर्ग और मध्य प्रदेश नगरीय निकाय अध्यापक संवर्ग के अधीन काम करने वाले अध्यापक संवर्ग को स्कूल शिक्षा विभाग की सेवा में संविलियन का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया था। इसके अनुरूप ही 29 मई, 2018 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में निर्णय लिया गया था।

प्रदेश के 224 सामुदायिक विकासखंडों में विभागीय शैक्षणिक संस्थाओं में स्थानीय निकायों के अधीन एवं वर्तमान में कार्यरत अध्यापक संवर्ग के सहायक अध्यापक, अध्यापक, वरिष्ठ अध्यापक का शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया है। इनकी नियुक्ति मध्यप्रदेश राज्य स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक संवर्ग) शर्त एवं भर्ती नियम-2018 के अनुसार, प्राथमिक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक और उच्च माध्यमिक शिक्षक के पद पर की जाएगी।

नवगठित प्रकाशित नियम के प्रभावशील होने से अध्यापक संवर्ग में कार्यरत अध्यापक संवर्ग का अमला स्थानीय निकाय से स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन कार्यरत हो जाएगा। इस अमले को एक जुलाई, 2018 के नियमानुसार सातवें वेतनमान के लाभ के साथ-साथ शासकीय सेवकों के समान अन्य लाभ भी प्राप्त होंगे।

वहीं राज्य अध्यापक संघ के अध्यक्ष जगदीश यादव ने एक बयान जारी कर कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष एक विभाग, एक कैडर की मांग रखी थी। साथ ही एक जनवरी, 2016 से सातवें वेतनमान का लाभ दिए जाने का सुझाव दिया था, जिसे सरकार ने नहीं माना है। लिहाजा, सरकार के इस कदम का अध्यापक न तो स्वागत करते हैं और न ही धन्यवाद देते हैं। सरकार को इसमें सुधार का सुझाव दिया जाएगा।

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