बैतूल, 7 अगस्त (आईएएनएस)। कहा जाता है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, इसका प्रमाण बैतूल के आदिवासी मजदूर परिवार का संजय कुमार इवने है, जिसने पूरी मेहनत से पढ़ाई की और नीट में अनुसूचित जनजाति वर्ग की प्रावीण्य सूची में 94वीं रैंक पाई। इतना ही नहीं, उसका ग्वालियर के गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय में दाखिला भी हो गया है।
संजय ने बताया कि उसके पिता गुन्ना इवने एवं माताजी मिल्लोबाई इवने बैतूल जिले के चिचोली तहसील के ग्राम अक्तिखेड़ा के निवासी हैं। संजय इवने ने छठी से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय से की। इसके बाद उसकी चिकित्सक बनने की बहुत अािक इच्छा थी, परंतु आíथक स्थिति के चलते उसे एक बार तो पढ़ाई तक छोड़ना पड़ी थी, क्योंकि उनकी मां मजदूरी करती थी और पिताजी अक्सर बीमार रहते हैं।
संजय बताता है कि उनका सपना था कि नीट की तैयारी करने के लिए इंदौर में जाकर कोचिग करें और अच्छे रैंक के साथ नीट में चयनित होकर एक शासकीय मेडिकल कलेज में अययन का मौका मिले और एक सफल चिकित्सक बनकर गरीब लोगों की सेवा करें।
उन्होंने बताया कि आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के चलते उसके चिकित्सक बनने के सपने चकनाचूर हो चुके थे। वह बहुत ही निराश हो गया था। उसे लग रहा था कि अब वह कभी डॉक्टर नहीं बन पाएगा। इसी दौरान उन्हें डॉ. राजा धुर्वे (एमबीबीएस) ने न सिर्फ प्रोत्साहन दिया बल्कि कोचिग भी दी, जिसके चलते उनका नीट में चयन हुआ और सरकार चिकित्सा महाविद्यालय में दाखिला भी हो गया है।
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