कठुआ मामले के गवाह को ‘हिरासत में यातना’ पर राज्य से जवाब तलब

नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को जम्मू एवं कश्मीर सरकार से तालिब हुसैन की कथित रूप से ‘हिरासत में यातना’ पर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर जवाब मांगा। तालिब हुसैन, कठुआ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की पीड़िता के लिए न्याय मांगने वाले आंदोलन का एक प्रमुख सदस्य हैं।

हुसैन को राज्य पुलिस ने उनके खिलाफ कथित तौर पर दुष्कर्म के आरोप वाली एक प्राथमिकी के मद्देनजर गिरफ्तार किया था।

याचिकाकर्ता हुसैन के चचेरे भाई ने आरोप लगाया है कि कठुआ मामले की आठ साल की पीड़िता के समर्थन में अभियान चलाने के लिए उन्हें झूठे मामलें में फंसाया जा रहा है। पीड़ित एक खानाबदोश समुदाय से थी और उसकी जनवरी में हत्या कर दी गई।

राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम.खानविलकर व न्यायमूर्ति डी.वाई.चंद्रचूड़ की पीठ ने जम्मू एवं कश्मीर के महाधिवक्ता से भी मदद मांगी है।

याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने अदालत से कहा कि वह सिर्फ हिरासत में यातना को लेकर चिंतित हैं और किसी अन्य मुद्दे को लेकर नहीं।

जयसिंह ने शीर्ष अदालत के कई फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी संघीय अदालत का तर्क है कि एक व्यक्ति हिरासत में रहने पर भी अपने संवैधानिक अधिकारों का लाभ उठा सकता है।

याचिकाकर्ता की दलील है कि कार्यकर्ता तालिब हुसैन को कठुआ पीड़िता के लिए न्याय को लेकर सार्वजनिक अभियान का नेतृत्व करने के कारण फंसाया और प्रताड़ित किया गया है।

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