नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। कौशल और उद्यमिता मंत्रालय के सचिव के. पी. कृष्णन ने शनिवार को कहा कि देश के निजी कौशल प्रशिक्षण केंद्रों की हालत ‘बेहद खराब’ है।
राजधानी में ‘उभरते कौशल विकास और नियामक पारिस्थितिक तंत्र’ पर बोलते हुए नौकरशाह ने कहा, “सीखने के कौशल का मतलब कक्षाओं में ज्ञान प्राप्त करना नहीं है। यह वास्तव में कार्यस्थल पर चीजों को करने के बारे में है, न कि सिर्फ प्रयोगशाला में।”
विश्व बैंक और विभिन्न सरकारों के साथ काम करने वाले प्रशिक्षित अर्थशास्त्री कृष्णन ने कई रिपोर्ट लिखी हैं और इनके कई अकादमिक पत्र प्रकाशित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में नेशनल कौंसिल ऑन वोकेशनल ट्रेनिंग (एनटीवीटी) से संबद्ध लगभग 14,000 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) हैं, जिनमें से 84 फीसदी निजी क्षेत्र से संबंधित हैं।
कृष्णन ने कहा, “भारत में निजी आईटीआई सरकारी आईटीआई की तुलना में बदतर हैं, क्योंकि वहां गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशालाओं और उपकरणों की कमी है।”
उन्होंने सरकार से गंभीर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया, क्योंकि इन प्रशिक्षण केंद्रों में सुधार करने के प्रयासों में काफी सफलता नहीं मिली है।
नौकरशाह ने कहा कि भारत में निजी क्षेत्र कौशल प्रशिक्षण प्रमाणन को गंभीरता से नहीं लेता है।
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