इंफाल, 8 जनवरी (आईएएनएस)। मणिपुर में दो अलग-अलग हड़तालों से मंगलवार को जनजीवन पंगु हो गया है।
एक हड़ताल नागरिकता (संशोधन) विधेयक के विरोध में नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट आर्गनाइजेशन (एनईएसओ) द्वारा आहूत की गई है, तो दूसरी केंद्र की कॉर्पोरेट समर्थक, राष्ट्र-विरोधी और जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ 10 मजदूर संगठनों ने आहूत की है। मजदूर संगठनों ने दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।
इंफाल शहर सहित सभी शिक्षा संस्थान और जन सुविधा केंद्रों में सन्नाटा छाया रहा।
सड़कों से बसें, ट्रक और अन्य वाणिज्यिक वाहन नदारद रहे। दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान पूरी तरह ठप रहे।
हड़ताल कर रहे कुछ लोगों ने कुछ इलाकों में वाहनों की आवाजाही बाधित की।
एनईएसओ की हड़ताल पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिल मणिपुर छात्र संघ (एएमएसयू) के अध्यक्ष मंजीत सारंगथेम ने कहा, “पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के अल्पसंख्यकों के लिए द्वार खोलने से पूर्वोत्तर क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय लोग दलदल में फंस जाएंगे।”
उन्होंने कहा, “मणिपुर के निर्वाचित सदस्यों को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। मेघालय, मिजोरम के उनके समकक्षों ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। असम गण परिषद ने असम में भाजपा नीत सरकार से समर्थन वापस ले लिया है।”
सारंगथेम ने याद दिलाया कि कैसे मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने पिछले साल 21 मई को कहा था कि यह विधेयक केवल असम के लिए है और यह मणिपुर को प्रभावित नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि लेकिन तब से यहां एक बचाव तंत्र मौजूद है।
सारंगथेम ने चेताया कि अगर राज्य की भाजपा नीत गठबंधन सरकार स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाती है तो एएमएसयू विभिन्न रूप से आंदोलन की शुरुआत करेगा।
इसबीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव एल. सोतिनकुमार ने दावा किया कि एलआईसी, डाक घरों और बीएसएनएल के कर्मचारियों ने दो दिवसीय हड़ताल के लिए अपना समर्थन दिया है।
मणिपुर में सभी भाजपा कार्यालयों के समीप सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
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