विश्व पुस्तक मेला : अंतिम दिन उमड़ पड़े पुस्तकप्रेमी

नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी के प्रगति मैदान में 9 दिन से चल रहे विश्व पुस्तक मेले का रविवार को समापन हो गया। अंतिम दिन ‘छुट्टी का दिन’ होने की वजह से पुस्तकप्रेमी बड़ी संख्या में उमड़े। हिंदी किताबों के पबेलियन 12 व 12ए में सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक पढ़ाकू लोगों का हुजूम उमड़ता देखा गया। बाकी पबेलियनों में भी लगभग यही हाल रहा।

राजकमल प्रकाशन के स्टॉल जलसाघर में सुबह से ही पुस्तकप्रेमी अपने पसंद के पुस्तकों एवं लेखकों से मिलने भारी मात्रा में उपस्थित थे। इस बार मेले में जिस तरह छुट्टियों के दिन के अलावा कार्य के दिनों में भी पुस्तकप्रेमी बड़ी संख्या में उमड़े, यह देखकर कहा जा सकता है कि डिजिटल जमाने में भी किताबों की महत्ता कम नहीं हुई है।

राजकमल प्रकाशन, राधाकृष्ण प्रकाशन, लोकभारती प्रकाशन, वाणी प्रकाशन और उसी के सामने अंतिका प्रकाशन के स्टॉल पर काफी भीड़ देखी गई। प्रकाशकों के मुताबिक, विभिन्न विधाओं की पुस्तकों की जबरदस्त मांग रही।

क्लासिकल पुस्तकों में ‘रागदरबारी’, ‘मैला आँचल’, ‘तमस’, ‘जूठन’ ‘चित्रलेखा’, ‘काशी का अस्सी’ आदि किताबों की मांग रही। नई किताबों में ‘बेशरम’, ‘अपार खुशी का घराना’, ‘सहेला रे’, ‘जल थल मल’, ‘जनता स्टोर’, ‘ग्यारहवीं-अ के लड़के’, ‘पाजी नज्में’, ‘मंटो’ ‘शेखर : एक जीवनी’, ‘कुछ इश्क किया कुछ काम किया’, ‘इश्क कोई न्यूज नहीं’ जैसी किताबों के प्रति पाठकों का खास आकर्षण रहा।

कुछ और किताबें जैसे ‘धूप की मुंडेर’, ‘अस्थि का फूल’, ‘पानी को सब याद था’, ‘कौन देश के वासी’, ‘साये में धूप’, ‘उर्वशी’, ‘तुम मेरी जान हो रजिया बी’, ‘भारत और उसके विरोधाभास’, ‘संस्कृति के चार अध्याय’, ‘की रे हुकुम’ आदि किताबों के प्रति भी पाठकों की रुचि दिखी।

लेखक से मिलिए सत्र में राजकमल प्रकाशन के जलसाघर में लेखिका अरुं धति रॉय, तसलीमा नसरीन, अनुराधा बेनीवाल, अल्पना मिश्र, शाजी जमां, नवीन चौधरी, हिमांशु वाजपेयी, गीतांजलिश्री सरीखे लेखक-लेखिकाएं पुस्तक प्रेमियों से रूबरू हुए।

राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी ने 47वें विश्व पुस्तक मेले पर अपने विचार रखते हुए कहा, “किताब तो किताब है और किताब ही रहेगी, ई-बुक चलती किताब, ऑडियो बुक बोलती किताब, सिनेमा बुक दिखती किताब, हर किस्म की किताब फूल की पंखुड़ियां हैं, किताब होना इनका केंद्रीय तत्व है। मेरी हमेशा से यह सोच रही है जो इस विश्व पुस्तक मेले में भी ठीक साबित हुई। हमारे युवा पाठकों ने इसे साबित भी किया।”

अंतिम दिन राजकमल प्रकाशन के स्टॉल पर लेखिका सुजाता का कहानी संग्रह ‘एक बटा दो’, ‘त्रैमासिक आलोचना’, संजीव कुमार का कहानी संग्रह ‘इक्कीसवीं सदी’ एवं लोकभारती प्रकाशन से प्रकाशित रेनू अंशुल का कहानी संग्रह ‘कहना है कुछ’ का लोकार्पण हुआ।

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