भारत में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ी जागरूकता : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। मानसिक स्वास्थ्य के मसलों को अक्सर नजरंदाज करने की प्रवृत्ति रही है क्योंकि यह भारतीय समाज में इसके प्रति नकारात्मक धारणा रही है, लेकिन हालिया एक रिपोर्ट बताती है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर मदद की दरकार रखने वाले लोगों की तादाद में 80 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है।

खासतौर से यह इजाफा द्वितीय श्रेणी के शहरों में ज्यादा देखा गया है।

देसी डिजिटल हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म ‘प्रैक्टो’ ने गुरुवार को अपने ‘इंडियाज एनुअल हेल्थकेयर मैप’ का तीसरा संस्करण जारी किया है। इसमें स्वास्थ्य सम्बंधी चिंताओं, व्यवहारों और प्रवृत्तियों के बारे में बताया गया है।

हेल्थकेयर मैप का डाटा वर्ष 2018 में 50 से अधिक शहरों के 250 से अधिक स्पेशिएलिटीज पर करीब 13 करोड़ रोगियों के सर्च और अपॉइंटमेंट्स से लिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, देश में डिजिटल हेल्थकेयर अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ी है।

प्रैक्टो इनसाइट्स रिपोर्ट के अनुसार, देश के सात मेट्रो शहरों के बाहर रहने वाले भारतीय इस विषय के विशेषज्ञों से परामर्श ले रहे हैं और उनकी तादाद पहले की तुलना में बहुत अधिक हो गई है।

दूसरी श्रेणी के शहरों में अवसाद, पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी), शादी के लिए परामर्श, तनाव, व्यसन मुक्ति, क्रोध पर नियंत्रण, आदि के लिए साइकोलॉजिस्ट्स, साइकेट्रिस्ट्स और साइकोथेरैपिस्ट्स के साथ अपॉइंटमेन्ट में 82 प्रतिशत वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे अस्वास्थ्यकर जीवनशैली, लंबे समय तक काम करना और कार्य तथा जीवन के बीच असंतुलन का भी पता चलता है, जिससे लोगों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है

रिपोर्ट के अनुसार, रूमेटोलॉजिस्ट्स के पास जाने वालों की तादाद में 53.8 प्रतिशत वृद्धि हुई है और इंडोक्राइनोलॉजिस्ट्स के पास परामर्श के लिए जाने वाले मरीजों की संख्या 45.8 प्रतिशत बढ़ी।

यौन संबंधी स्वास्थ्य के उपचार के मामले में टेलीकंसल्ट यूजर्स में पिछले वर्ष से 268 प्रतिशत वृद्धि हुई है। यह वृद्धि खासतौर से दिल्ली, बैंगलोर और मुंबई में देखी गई है।

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