मप्र में कमलनाथ के करीबियों पर आयकर छापों से कांग्रेस में खामोशी

भोपाल, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में आयकर विभाग की टीमों द्वारा मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों के ठिकानों पर मारे गए छापों में बड़ी मात्रा में नगदी मिलने से कांग्रेस से खामोशी छा गई है। कांग्रेस के सभी नेता बचाव की मुद्रा में हैं और चुनाव को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक विद्वेष से की गई कार्रवाई बता रहे हैं, मगर रकम के मिलने की बात को नहीं झुठला पा रहे हैं।

भोपाल, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में आयकर विभाग की टीमों द्वारा मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों के ठिकानों पर मारे गए छापों में बड़ी मात्रा में नगदी मिलने से कांग्रेस से खामोशी छा गई है। कांग्रेस के सभी नेता बचाव की मुद्रा में हैं और चुनाव को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक विद्वेष से की गई कार्रवाई बता रहे हैं, मगर रकम के मिलने की बात को नहीं झुठला पा रहे हैं।

लोकसभा चुनाव के करीब होने के बीच रविवार तड़के आयकर विभाग के दलों ने एक साथ भोपाल और इंदौर में एक साथ दबिश दी। दोनों स्थानों पर जिन भी लोगों के यहां छापे मारे गए है, वह मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों में गिने जाते है। इनमें ओएसडी (विशेश ड्यूटी पर तैनात अधिकारी) प्रवीण कक्कड़ का प्रमुख नाम है। इसके अलावा भोपाल में एक गैर सरकारी संगठन अश्विनी शर्मा, कक्कड़ के करीबी प्रतीक जोशी के यहां भी मारे गए छापों में बड़ी मात्रा में नगदी मिलने की बात सामने आई है।

इन छापों के बाद कांग्रेस अब पूरी तरह बचाव की मुद्रा में है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मानक अग्रवाल ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि, यह सब केंद्र सरकार के इशारे पर हो रहा है, जब कांग्रेस की सरकार आएगी तो वह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के यहां भी छापे पड़वाएगी।

वहीं भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि, कांग्रेस एक तरफ तो गलत काम करती है, दूसरी ओर जब उनके खिलाफ कार्रवाई होती है तो राजनीतिक आरोप लगाने लगते हैं। आयकर विभाग अपना काम कर रहा है।

कांग्रेस की मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा केंद्र सरकार पर राजनीतिक विद्वेष पूर्व कार्रवाई किए जाने का आरोप लगा रही हैं। उन्होंने सरकारी एजेंसियों पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि क्या सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग की नजरों में विपक्ष के लोग ही भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, उन्हें चौकीदार और उनकी चोर मंडली का भ्रष्टाचार नजर नहीं आता।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या येदियुरप्पा की डायरी में भाजपा को दिए गए जिस 1000 करोड़ रुपये का जिक्र था, वह भ्रष्टाचार नहीं था, क्या जेटली और गडकरी को उनके द्वारा दिए गए 150-150 करोड़ रुपये, राजनाथ सिंह को दिए गए 100 करोड़ रुपये भ्रष्टाचार नहीं था, ये कैसा दोहरा मापदंड है।

कांग्रेस के नेता नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहते हैं कि आयकर विभाग का छापा यूं ही नहीं पड़ा है, बल्कि कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद उन लोगों की चौकड़ी सक्रिय हो गई थी, जिन्होंने भाजपा के शासनकाल में भी सुख-सुविधाओं का लाभ उठाया। कांग्रेस के सत्ता में आते ही भोपाल में डेरा जमा लिया और ऐसे लेागों से करीबी बना ली जो भाजपा के काल में गलत कामों में लिप्त थे।

उन्होंने आज जिन लोगों के यहां छापा पड़ा है, उनका पिछला टेक रिकार्ड भी देख लिया जाए, वे क्या थे और अब क्या है। इसके अलावा भी कई लोग राजधानी में इतने ताकतवर बनकर उभरे हैं, जिनका अपने जिलों में वार्ड स्तर तक पर जनाधार नहीं हैं। वर्तमान में कांग्रेस को वही लोग चला रहे हैं।

कांग्रेस को कोई भी बड़ा नेता इस बात का जवाब नहीं दे रहा है कि आखिर जिन लोगों के यहां छापा पड़ा उनके पास इतनी बड़ी रकम क्यों रखी गई थी। जब लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू है और 50 हजार से ज्यादा की नगदी रखने का प्रावधान नहीं है तो करोड़ों रुपये उनके घरों में क्यों थे।

भाजपा लगातार पिछले तीन माह से राज्य की कांग्रेस सरकार पर तबादला उद्योग चलाकर वसूली करने का आरोप लगाती आ रही है और अब इन छापों के बाद उसे बड़ा मुद्दा मिल गया है। यही कारण है कि भाजपा राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट कर कहा, “मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ओएसडी के घर मिली ट्रांसफर उद्योग की काली कमाई से स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस चोर है और इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की चुप्पी बताती है कि वह चोरों के सरदार हैं।”

राजनीति के जानकारों की मानें तो कमलनाथ के सत्ता में आने के बाद अब तक उन पर कोई बड़ा आरोप नहीं लगा था, मगर लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया के दौरान उनके करीबियों के पास करोड़ों की नगदी मिलने से वे भी घेरे में आ गए हैं। यह सही है कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद उन लोगों की अचानक सक्रियता बढ़ी, जिन्होंने संघर्ष तो नहीं किया, बल्कि अपने हित साधने में जुट गए। भाजपा की ओर से तबादलों के नाम पर वसूली के आरोप लगे और अब इन छापों ने उन आरोपों को पुष्ट करने का काम किया है, जिसका कांग्रेस के लिए जवाब देना कठिन हो जाएगा।

मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों के यहां पड़े छापों के बाद कांग्रेस कार्यालय से लेकर नेताओं के आवासों पर पिछले दिनों के मुकाबले चहल पहल कम रही। कोई बड़ा नेता खुलकर सामने आने को तैयार नहीं हुआ। वहीं भाजपा में उत्साह है, इंदौर में तो कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व मुख्यमंत्री कमलनाथ का मुखौटा लगाकर प्रदर्शन किया और नकली नोट तक उड़ाए।

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