नई दिल्ली-बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision- SIR) अभियान की के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी इस प्रक्रिया की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. इसके तहत उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद हर मतदाता को वोट डालने से पहले एक गणना फॉर्म भरना अनिवार्य होगा.
इस नए नियम के लिए बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करना होगा और उनके आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन करना होगा. इस नए नियम का मकसद है कि मतदाता सूची को और भी ज्यादा पारदर्शी बनाया जा सके. इसे लेकर चुनाव आयोग तेजी के साथ अपनी तैयारी कर रहा है.
उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी संबंधित अधिकारियों को इस नियम को अच्छे लागू करने को लेकर ट्रेनिंग दे दी है. सबसे पहले एसआईआर प्रक्रिया के लिए साल 2003 की मतदाता सूची को वेबसाइट ceouttarpradesh.nic.in पर अपलोड करने का काम चल रहा है.
इन मतदाताओं को दिखाने होंगे दस्तावेज
चुनाव आयोग की तरफ से बताया गया है कि जिन मतदाताओं के नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं है और उनका जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ है. ऐसे लोगों को 11 मान्य दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज बीएलओ दिखाना होगा. इसके अलावा तीसरी श्रेणी में वो मतदाता होंगे जिनका जन्म 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच हुआ है, उन्हें अपना कोई एक मान्य दस्तावेज और अपने माता या पिता में से किसी एक का मान्य दस्तावेज देना होगा. इसके अलावा बताया गया है कि इस दौरान जन्में मतदाताओं के माता या पिता का नाम अगर 2003 की मतदाता सूची में है, तो उनके ब्योरे भी प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है.
कई रिपोर्ट्स के मुताबिक माना जा रहा है करीब 30% मतदाताओं को इस प्रक्रिया के दौरान अपने दस्तावेज दिखाने पड़ेगे. इस दौरान BLO घर पर पहले से भरा हुआ फॉर्म लेकर आएंगे, जहां मतदाता को केवल हस्ताक्षर करने होंगे. जिससे की ये प्रक्रिया आसान बन जाएगी.
dharmpath.com dharmpath