भोपाल में 23 लोगों की आंख-चेहरे झुलसे,खतरा बना देसी पटाखा गन

भोपाल-दिवाली पर बाजारों में खुलेआम बिक रही सस्ती देसी पटाखा गन अब खतरे का नया नाम बन गई है। महज 100 से 200 रुपये में मिलने वाली यह गन अब तक 23 लोगों की आंखों और चेहरों को झुलसा चुकी है। डॉक्टरों का कहना है कि यह कोई खिलौना नहीं बल्कि केमिकल गैस से फटने वाला छोटा बम है जो सेकंडों में आंखों की रोशनी छीन सकता है।

गांधी मेडिकल कॉलेज, बीएमएचआरसी और एम्स भोपाल में अब तक इस पटाखे से प्रभावित कई बच्चे भर्ती हो चुके हैं। इनमें ज्यादातर 8 से 12 साल के बच्चे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक यह पहला साल है जब दिवाली पर ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। रविवार शाम 5 बजे से सोमवार सुबह 9 बजे तक 11 नए केस अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचे। संभावित हादसों को देखते हुए गांधी मेडिकल कॉलेज, एम्स और जेपी अस्पताल ने इमरजेंसी ऑपरेशन यूनिट, आई डिपार्टमेंट और बर्न टीमों को अलर्ट पर रखा है।

इस गन से निकलने वाले विस्फोट में आंख की पुतली और कॉर्निया को गहरी चोट लगती है। कई मामलों में स्टेम सेल डैमेज होने से कॉर्निया स्थायी रूप से खराब हो सकता है। कुछ मरीजों में ऑप्टिक न्यूरोपैथी (आंख की नसों को नुकसान) और रेटिना में सूजन जैसे गंभीर लक्षण देखे गए हैं। उन्होंने साफ कहा, “यह कोई खिलौना नहीं, यह एक बम है जो बच्चों की जिंदगी हमेशा के लिए अंधेरे में डाल सकता है।”

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