नई दिल्ली-लोकसभा में हालिया घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस की महिला सांसदों ने सोमवार को स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखकर गहरी नाराजगी और चिंता जाहिर की है। इस पत्र के माध्यम से विपक्षी महिला सांसदों पर लगाए गए निराधार और मानहानिकारक आरोपों के साथ-साथ विपक्ष के संसदीय अधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया।
यह पत्र तमिलनाडु की लोकसभा सांसद एस जोतिमणि के लेटरहेड पर लिखा गया है, जिस पर सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, आर सुधा, ज्योत्सना चरणदास महंत और वर्षा एकनाथ गायकवाड़ सहित कई महिला सांसदों के हस्ताक्षर हैं। पत्र में महिला सांसदों ने लिखा, ‘हम यह पत्र गहरे दुख और संवैधानिक जिम्मेदारी की मजबूत भावना के साथ लिख रहे हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आप, लोकसभा के माननीय स्पीकर और इस गरिमामय सदन के संवैधानिक संरक्षक होने के नाते, सत्ताधारी पार्टी द्वारा विपक्ष की महिला सांसदों, खासकर इंडियन नेशनल कांग्रेस की सांसदों के खिलाफ झूठे, निराधार और मानहानिकारक आरोप लगाने के लिए मजबूर किए गए हैं।’
महिला सांसदों ने आगे लिखा, ‘स्पीकर का पद एक संवैधानिक पद है, जिसका मकसद संसद की गरिमा की रक्षा करना, निष्पक्षता सुनिश्चित करना और पार्टी संबद्धता की परवाह किए बिना सभी सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना है।’ पत्र में आगे कहा गया, ‘राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान, स्थापित संसदीय परंपरा के अनुसार सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष दोनों को बोलने की अनुमति दी जाती है, जिसके बाद प्रधानमंत्री जवाब देते हैं। फिर भी, पिछले लगातार चार दिनों से विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लोकसभा में जानबूझकर यह अवसर नहीं दिया गया है। यह अभूतपूर्व और अक्षम्य है। दूसरी ओर, इंडिया गठबंधन के आठ सांसदों को सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर निलंबित कर दिया गया और एक बीजेपी सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में अश्लील और अभद्र तरीके से बोलने की अनुमति दी गई।
सांसदों ने कहा कि जब हम आपसे मिले, तो हमने न्याय और उपरोक्त बीजेपी सांसद के निलंबन की मांग की। पत्र में कहा गया कि आपने स्वीकार किया कि एक गंभीर गलती हुई है और हमसे शाम 4 बजे वापस आने को कहा। आपसे दोबारा मिलने पर आपने कहा कि आप इस मुद्दे पर सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि ऐसे मामलों में अब आप निर्णय लेने वाले नहीं हैं। यह सदन के स्पीकर के रूप में आपके अधिकार पर गंभीर सवाल उठाता है। इसके बाद, शाम 5 बजे पारंपरिक प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए प्रधानमंत्री को लोकसभा में बोलने का कार्यक्रम था। इंडिया गठबंधन के सभी सदस्य विरोध में खड़े हो गए और प्रधानमंत्री सदन में उपस्थित नहीं हुए।
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