टेक्सास-अमेरिका के टेक्सास राज्य में भारतीय-अमेरिकी समुदाय एक बार फिर कट्टरपंथी बयानबाजी का शिकार हुआ है. टेक्सास के शुगर लैंड (Sugar Land) शहर में स्थित भगवान हनुमान की भव्य 90 फीट ऊंची प्रतिमा को लेकर कंजर्वेटिव पार्टी के एक कार्यकर्ता की आपत्तिजनक टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर नई वैचारिक जंग छेड़ दी है.
डैलस-फोर्ट वर्थ क्षेत्र के रिपब्लिकन कार्यकर्ता कार्लोस टर्किओस (Carlos Turcios) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर हनुमान प्रतिमा का एक वीडियो साझा करते हुए इसे घुसपैठ का प्रतीक बताया. उन्होंने लिखा कि यह पाकिस्तान का इस्लामाबाद या भारत का नई दिल्ली नहीं है. यह शुगर लैंड, टेक्सास है. थर्ड वर्ल्ड एलियंस धीरे-धीरे टेक्सास और अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं. यह अमेरिका की तीसरी सबसे बड़ी प्रतिमा क्यों है? घुसपैठ को रोको. वहीं, टर्किओस की इस टिप्पणी को भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने जेनोफोबिक (Xenophobic) और नस्लवादी करार दिया है.
इस नफरती बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कार्लोस टर्किओस को जमकर आईना दिखाया. कई यूजर्स ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिमा किसी सार्वजनिक फंड से नहीं, बल्कि हिंदुओं ने अपनी निजी जमीन पर अपने संसाधनों से बनाई है. अमेरिकी मीडिया के फेमस जर्नलिस्ट एडिले नजारियन ने लिखा कि टेक्सास के हिंदू पश्चिमी सभ्यता के लिए खतरा नहीं हैं और हिंदू धर्म में धर्मांतरण की कोई परंपरा नहीं है. एक्सपर्ट्स ने तर्क दिया कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय अमेरिका की अर्थव्यवस्था और तकनीक में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले समूहों में से एक है. नस्लीय भेदभाव की घटनाओं को लेकर एक्सपर्ट्स का दावा है कि अमेरिका में MAGA (Make America Great Again) विचारधारा के बढ़ते प्रभाव के बीच अप्रवासी समुदायों की धार्मिक पहचान पर हमले बढ़े हैं. भारतीय-अमेरिकी जो चिकित्सा, शिक्षा और व्यापार में अग्रणी हैं, उन्हें अब अपनी धार्मिक अभिव्यक्ति के लिए भी नस्लवादी टिप्पणियों का सामना करना पड़ रहा है.
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