तेहरान – डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से ईरान पर ‘ऑपरेशन फ्यूरी’ का हमला शुरू करने के कुछ ही दिनों बाद क्रेमलिन ने तेहरान के साथ एक समझौता किया. इसके तहत मार्च की शुरुआत तक, हथियारों की खेप भेजी जानी शुरू हो चुकी है. मॉस्को और तेहरान के बीच अगले तीन सालों में सैकड़ों लॉन्च यूनिट्स और हजारों मिसाइलों के लिए पहले ही एक समझौता हो चुका है. लेकिन मॉस्को ने अपना S-400 सिस्टम देने से साफ मना कर दिया है, क्योंकि उसे अमेरिका के साथ सीधे टकराव का डर है. इतनी आधुनिक टेक्नोलॉजी को तैनात करने के लिए शायद जमीन पर रूसी टीमों की जरूरत पड़ेगी, जिससे वे सीधे तौर पर अमेरिकी सेनाओं के साथ लड़ाई में शामिल हो जाएंगे.
खबरों के अनुसार, रूस और ईरान के बीच एक अहम सप्लाई रूट कैस्पियन सागर के बीच है. इसी रास्ते रूस से हथियार आने के दावा हैं. जांचकर्ताओं का मानना है कि RAF अक्रोटिरी पर हमला करने वाले कामिकाज़े ड्रोन में रूस में बना कोमेटा-B नेविगेशन सिस्टम लगा था. इसलिए इजराइल ने पिछले हफ्ते इस रास्ते पर हमला किया, ताकि इस सप्लाई लाइन को बाधित किया जा सके.
पुतिन पर युद्ध क्षेत्र में अत्याधुनिक ड्रोन जैसे हथियार भेजने का आरोप लग रहा है. ड्रोन के सटीक मॉडल अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन संभावना है कि रूस ‘गेरान-2’ जैसे ड्रोन की सप्लाई करेगा, जो ईरान के अपने ‘शाहिद-136’ डिजाइन पर आधारित हैं. रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ शोधकर्ता एंटोनियो गिउस्टोज़ी ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया, ईरान को और ड्रोन की ज़रूरत नहीं है. उन्हें बेहतर ड्रोन की जरूरत है. वे उन्नत क्षमताओं वाले ड्रोन चाहते हैं. इसके अलावा पर्दे के पीछे, क्रेमलिन अपने सहयोगी को सैटेलाइट तस्वीरें, टारगेट से जुड़ा डेटा और अहम खुफिया जानकारी देकर मजबूत कर रहा है.
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