खरगोन-मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की भगवानपुरा तहसील स्थित दगड़खेड़ी गांव में भूमि अधिकारों को लेकर आदिवासी किसानों और जिला प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है। गांव के दर्जनों आदिवासी परिवारों का आरोप है कि दशकों से जिस जमीन पर वे खेती कर रहे हैं और जिसके स्वामित्व संबंधी दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं उसका रिकॉर्ड एमपी भूलेख पोर्टल से गायब है या उसे शासकीय भूमि के रूप में दर्ज कर दिया गया है। दूसरी ओर जिला प्रशासन ने किसानों के दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि संबंधित भूमि पिछले लगभग 100 सालों से सरकारी रिकॉर्ड में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है और जांच में किसी प्रकार की रिकॉर्ड संबंधी त्रुटि सामने नहीं आई है।
विवाद भगवानपुरा तहसील के दगड़खेड़ी गांव के उन आदिवासी परिवारों से जुड़ा है जो सालों से संबंधित जमीन पर खेती कर रहे हैं। इनमें अकला चमार जैसे किसान भी शामिल हैं जिनके पास राजस्व विभाग द्वारा जारी भूमि अधिकार एवं ऋण पुस्तिका, पुराने भूमि पंजीयन दस्तावेज और सहकारी बैंक से भूमि के आधार पर लिए गए लोन का रिकॉर्ड मौजूद है। किसानों का कहना है कि इन दस्तावेजों के बावजूद एमपी भूलेख पोर्टल पर उनके नाम या संबंधित खसरा नंबर दिखाई नहीं देते हैं। जिसकी वजह से उनके स्वामित्व पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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