श्रीनगर-लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन यूएलसी (यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल) की नई धमकी ने कश्मीर घाटी में काम कर रहे करीब 7,000 कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की जिंदगी में फिर से डर भर दिया है. धमकी सीधी और साफ है, या तो सरकारी नौकरी छोड़ दो, या फिर जानलेवा नतीजों के लिए तैयार रहो. उन्हें दिल्ली का मोहरा कहा गया है और चेतावनी दी गई है कि वे चले जाएं वरना गोलियों का सामना करें.
सोशल मीडिया पर यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) की ओर से कथित तौर पर धमकी भरा एक नया मैसेज सामने आया है. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि ULC प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक ऑनलाइन प्रॉक्सी फ्रंट है. इस बार लेटर में खास तौर पर जम्मू-कश्मीर में काम करने वाले बाहरी मजदूरों को निशाना बनाया गया है. उन पर स्थायी रूप से बसने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है और चेतावनी दी गई है कि लिंग या हैसियत की परवाह किए बिना उन्हें हिंसक नतीजों का सामना करना पड़ेगा.
मैसेज में दावा किया गया है कि ये बाहरी लोग इलाके में भिखारी बनकर आए थे और अब रेजिडेंसी (निवास का अधिकार) पाने के लिए प्रॉक्सी प्रशासन के समर्थन से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इसमें स्थानीय लोगों से उन्हें बाहर निकालने के लिए कहा गया है, विरोध प्रदर्शनों को दिखावा बताया गया है और कहा गया है कि जो लोग दिल्ली के मोहरे बने रहेंगे, वे हमारी गोलियों के नतीजों से बच नहीं पाएंगे और उनके शव उनके मूल स्थानों पर वापस भेज दिए जाएंगे. इस मैसेज का लहजा ULC के पहले के संदेशों जैसा ही है, जिसमें कब्जे और आबादी में बदलाव के बारे में राजनीतिक दावों के साथ-साथ आम नागरिकों को सीधे तौर पर डराने-धमकाने की बातें शामिल हैं.
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