जबलपुर-मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दमोह के एक स्कूल के पूर्व पदाधिकारियों, शिक्षक और सहायक शख़्स के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर रद्द करने से इनकार कर दिया है.इन लोगों पर स्कूल के स्टूडेंट्स पर अनिवार्य हिजाब और कुछ धार्मिक प्रथाएं थोपने का आरोप है. इसके चलते स्कूल के पूर्व पदाधिकारियों पर 2023 में एफ़आईआर दर्ज की गई थी.एफ़आईआर भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 295-ए, 120-बी और 506 के भाग-II के तहत दर्ज की गई थी.धारा 295-ए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण काम से जुड़ी है. धारा 120-बी आपराधिक साज़िश और धारा 506 आपराधिक धमकी से संबंधित है.इसके अलावा, ‘जूवेनाइल जस्टिस एक्ट’ और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत भी एफ़आईआर दर्ज की गई थी.
लाईव लॉ के मुताबिक़, कोर्ट ने कहा, “इन आरोपों को पहली नज़र में बेतुका नहीं कहा जा सकता और न ही यह कहा जा सकता है कि इनमें अपराध होने की कोई संभावना नहीं है.”
कोर्ट ने कहा कि आरोपों की सचाई का फ़ैसला सबूतों के आधार पर होगा. एफ़आईआर को चुनिंदा तरीके़ से पढ़कर और जांच के दौरान जुटाए गए बयानों और दूसरे दस्तावेज़ों को नज़रअंदाज़ करके इस पर फ़ैसला नहीं किया जा सकता.कोर्ट के मुताबिक़, एफ़आईआर में स्टूडेंट्स से कथित तौर पर एक ‘ख़ास ड्रेस कोड और धार्मिक प्रथाओं’ का पालन कराए जाने का साफ़ ज़िक्र है.एफ़आईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि ये काम स्टूडेंट्स की इच्छा के ख़िलाफ़ और धमकी या दबाव देकर कराए गए.
कोर्ट के मुताबिक़, एफ़आईआर में स्टूडेंट्स से कथित तौर पर एक ‘ख़ास ड्रेस कोड और धार्मिक प्रथाओं’ का पालन कराए जाने का साफ़ ज़िक्र है.
एफ़आईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि ये काम स्टूडेंट्स की इच्छा के ख़िलाफ़ और धमकी या दबाव देकर कराए गए.
धारा 295-ए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण काम से जुड़ी है. धारा 120-बी आपराधिक साज़िश और धारा 506 आपराधिक धमकी से संबंधित है.
इसके अलावा, ‘जूवेनाइल जस्टिस एक्ट’ और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत भी एफ़आईआर दर्ज की गई थी
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