नई दिल्ली – अगस्त में फूड इंडेक्स की थोक महंगाई 7.05% रही, जो जुलाई के 6.65% से ज्यादा है. यानी खाद्य महंगाई में एक महीने में 0.40 फीसदी का इजाफा हुआ. खाने-पीने की चीजों और फूड प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी ने कुल महंगाई को ऊपर खींचा.थोक महंगाई में सबसे ज्यादा प्रेशर फ्यूल और पावर से देखने को मिला. अगस्त में इस कैटेगरी की महंगाई दर 22.93% रही, जो फूड और मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स से काफी ज्यादा है. मिनरल ऑयल की कीमतों में बदलाव ने भी इस बढ़ोतरी में बड़ी भूमिका निभाई.
अगस्त में मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स की थोक महंगाई 8.37% रही, जबकि जुलाई में यह 8.29% थी. बेसिक मेटल्स, नॉन-फूड आर्टिकल्स और केमिकल व केमिकल प्रोडक्ट्स की कीमतों ने इस दबाव को बढ़ाया. मतलब महंगाई का असर फैक्ट्रियों और इंडस्ट्री तक भी पहुंच गया है.सरकार के मुताबिक अगस्त 2026 में मिनरल ऑयल, फूड आर्टिकल्स, फूड प्रोडक्ट्स, बेसिक मेटल्स, नॉन-फूड आर्टिकल्स और केमिकल प्रोडक्ट्स प्रमुख महंगाई बढ़ाने वाले क्षेत्र रहे. यानी इस बार सिर्फ खाने की चीजें ही नहीं, बल्कि ईंधन और औद्योगिक सामान के भी दाम बढ़े.
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और उर्वरक की लागत बढ़ने का असर भी कीमतों पर पड़ा. मिडिल ईस्ट में तनाव और होर्मुज (Hormuz Crisis) से जुड़े घटनाक्रमों के बीच इन लागतों में तेजी आई. इसका असर भारत में ईंधन और दूसरी चीजों की कीमतों पर दबाव के रूप में दिखाई दिया.
यह थोक महंगाई तब बढ़ी, जब RBI महंगाई और ब्याज दरों पर लगातार नजर रख रहा है. पिछले महीने MPC ने बेंचमार्क पॉलिसी रेट 5.25% पर बरकरार रखा था. RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई का अनुमान 5% रखा है और कमजोर व असमान मॉनसून तथा अल नीनो को महंगाई के जोखिमों में गिना है.
अगर थोक स्तर पर लागत लगातार बढ़ती है, तो कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है. इसका असर आगे चलकर कुछ सामान की रिटेल कीमतों पर भी पड़ सकता है. खासकर फ्यूल, कच्चे माल और खाने की कीमतें ऊंची रहीं तो आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव बना रह सकता है.
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