प्रभावी संचार पहुंच के लिए कौशल विकास बेहद जरूरी : राठौर

नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल (सेवानिवृत्त) राज्यवर्धन राठौर ने कहा है कि उनके मंत्रालय द्वारा फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी पर पहली राष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन की पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण पर आधारित है जो उपयुक्त प्रशिक्षण तरीकों और उपकरणों के जरिए कौशल उन्नयन पर ध्यान देते रहे हैं।

इस कार्यशाला का आयोजन ‘हुनरमंद भारत’ पहल के मूलभूत मानदंडों को ध्यान में रखकर किया गया है। ‘हुनरमंद भारत’ पहल के मूल सिद्धांतों और रूपरेखा को ध्यान में रखते हुए इस कार्यशाला का उद्देश्य फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी से जुड़े सरकारी कर्मचारियों के हुनर को और बेहतर करना है।

फोटोग्राफी की कला और कौशल पर राठौर ने कहा कि किसी भी अन्य कला की भांति फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी में भी उचित तत्वों से महारथ हासिल की जा सकती है और इस दिशा में यह कार्यशाला एक उपयुक्त तत्व की तरह है।

राठौर ने गुरुवार को यहां नेशनल मीडिया सेंटर में पहली राष्ट्रीय फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी कार्यशाला में अपने संबोधन में यह बात कही। यह प्रयास अपने दृष्टिकोण में एक तरह से नवाचारी है जिसमें संबद्ध क्षेत्रों के विशेषज्ञ हैं और उनका मंत्रालय इसी तरह की कार्यशालाओं के आयोजन की संभावनाओं को पूर्वोत्तर सहित देश के अन्य हिस्सों में भी तलाशेगा जहां इस तरह की प्रचुर संभावनाएं हैं।

राठौर ने फोटोग्राफी के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि तस्वीरों का प्रभाव दीर्घकालिक होता है और आज भी कई ऐतिहासिक अवसरों को उस समय लिए गए विभिन्न प्रकार के फोटोग्राफ के जरिए ही याद किया जाता है। शायद यही एक कारण है जिसकी वजह से विभिन्न विषयों पर ‘कॉफी टेबल बुक्स’ इतनी अधिक लोकप्रिय हुई है।

इस कार्यशाला की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता कला एवं फोटोग्राफी की सराहना के इतिहास का संयुक्त सत्र था जिसमें प्रख्यात फोटोग्राफर राजेश बेदी, मशहूर सिनेमैटोग्राफर संतोष सीवान ने अपने विचार व्यक्त किए। एस. एन. सिंह ने इस विषय के विकास और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर भी अपनी प्रस्तुति दी।

इस एक दिवसीय कार्यशाला में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर दो समानांतर सत्रों का आयोजन किया गया और इनका आयोजन दोनों क्षेत्रों में समान विषयवस्तु, इनके प्लेटफॉर्म और कौशल/उपकरणों की आवश्यकता तथा उनके समकालीन विकास को ध्यान में रखकर किया गया। इस कार्यशाला में लगभग 25 संगठन/सरकारी मंत्रालयों के अलावा 135 से अधिक अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।

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