शिमला, 30 मार्च (आईएएनएस)। ग्रीन ऑस्कर विजेता वृत्तचित्र फिल्मकार माइक पांडे को हिमाचल प्रदेश के वन्यजीवन पर आधारित बड़े बजट के वृत्तचित्र के निर्माण के लिए एक और मौका मिल गया है, जिससे इसके निर्माण में आई रुकावटें दूर हो गई हैं।
शिमला, 30 मार्च (आईएएनएस)। ग्रीन ऑस्कर विजेता वृत्तचित्र फिल्मकार माइक पांडे को हिमाचल प्रदेश के वन्यजीवन पर आधारित बड़े बजट के वृत्तचित्र के निर्माण के लिए एक और मौका मिल गया है, जिससे इसके निर्माण में आई रुकावटें दूर हो गई हैं।
राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि करीब 69 लाख रुपये के बड़े बजट की यह परियोजना पिछले तीन साल से लंबित पड़ी थी, जिसे पूरा करने के लिए राज्य के वन विभाग ने दिग्गज फिल्मकार पांडे को एक और मौका दिया है। यह वृत्तचित्र 30-30 मिनट के चार भागों में बनना है।
वृत्तचित्र प्रदेश के विलुप्तप्राय तीतर सहित दूसरे बेशकीमती वन्यजीवों पर भी प्रकाश डालता है। राज्य सरकार ने माइक को फिल्म की कुल लागत 69 लाख रुपये में से 40 लाख रुपये की सहायता शुरुआत में वृत्तचित्र को फिल्माने के लिए दी थी।
इतने बड़े बजट की वृत्तचित्र के पूरा होने में हो रही देरी से चिंतित वन मंत्री ठाकुर सिंह भारमौरी ने पिछले महीने कहा था कि तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक संजीव पांडे के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है, जिन्होंने माइक को इस फिल्म को फिल्माने का काम सौंपा था।
माइक को ‘द लास्ट माइग्रेशन-वाइल्ड एलीफेंट कैप्चर इन सरगुजा’ और ‘शॉर्स’ ऑफ साइलेंस-व्हेल्स शार्क्स इन इंडिया’ जैसे उम्दा वृत्तचित्र बनाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने वृत्तचित्र निर्माण के क्षेत्र में 300 से ज्यादा पुरस्कार जीते हैं।
माइक को 69 लाख रुपये वाली लागत का वृत्तचित्र बनाने का काम 2010 में हिमाचल प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार ने सौंपा था। समझौता ज्ञापन के मुताबिक फिल्म को दो साल के भीतर पूरी हो जानी थी।
माइक अपनी फिल्म में हिमाचल प्रदेश के वन्यजीवों विलुप्तप्राय तीतर के अलावा पोंग डैम जलाशय, महा हिमालय राष्ट्रीय पार्क संरक्षण क्षेत्र, पश्चिमी हिमालय में भारत के सर्वाधिक समृद्ध जैव विविधता स्थल और लाहौल एवं स्पीति स्थित ऊंचाई से गिरने वाले हिमखंडों से बने चंदरताल पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे।
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